सिविल अस्पताल में दाखिल एक मरीज को दो घंटे तक स्ट्रेचर नहीं मिला। इसको लेकर इमरजेंसी स्टाफ व मरीज के परिजनों के बीच कहासुनी हुई। कई देर तक हंगामा चलता रहा। बाद में मेडिकल अधीक्षक के हस्तक्षेप पर मरीज को स्ट्रेचर मिला ओर उसे पट्टी के लिए ले जाया गया। मामले में सिविल अस्पताल में अव्यवस्था की पोल खुल गई।
शहर की देव कॉलोनी निवासी राजेंद्र सिंह दिल्ली पुलिस में सिपाही है
। कई दिन पहले हादसे में उसके पांव की हड्डी टूट गई। इसके बाद से वह इलाज के लिए सिविल अस्पताल में दाखिल है। मंगलवार को उसे पट्टी बदलने के लिए ले जाया जाना था। टांग की हड्डी टूटी होने की वजह से वह चल नहीं पाया। परिजन उसके लिए स्ट्रेचर लेने इमरजेंसी में गए। स्ट्रेचर लेकर लौट रहे थे तो इमरजेंसी स्टाफ ने उनको स्ट्रेचर ले जाने से रोक दिया। इसको लेकर स्टाफ व मरीजों के परिजनों के परिजनों में कहासुनी हो गई और इसके बाद खूब हंगामा व विवाद हुआ।
मरीजों के लिए नहीं स्ट्रेचर
सिविल अस्पताल में पिछले दिनों 6 नए स्ट्रेचर आए हैं। खास बात है कि इनको मरीजों की मदद की बजाय अन्य कामों में प्रयोग में लाया जा रहा है। मंगलवार को जब स्ट्रेचर के लिए हंगामा हुआ तो भी दो स्ट्रेचर अन्य कामों में प्रयुक्त थे। एक पर जहां लकड़ी का दरवाजा रख कर वार्ड में पहुंचाया जा रहा था, वहीं दूसरे में ऑक्सीजन के सिलेंडर लादे गए थे। मरीजों के लिए यहां जो स्ट्रेचर हैं उनके पहिये नहीं चलते ओर जो चलने के लायक हैं उनका प्रयोग दूसरे कामों में हो रहा है।
एमएस ने दिलाया स्ट्रेचर
मरीज राजेंद्र के परिजनों व अस्पताल स्टाफ में स्ट्रेचर को लेकर छिड़ा विवाद मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. एन के गर्ग के पास पहुंचा। उन्होंने मामले में हस्तक्षेप करते हुए एक महिला कर्मी को इमरजेंसी भेजा और मरीज के परिजनों को स्ट्रेचर दिलाया। इस पर विवाद तो शांत हो गया, लेकिन सवाल खड़ा हो गया कि दो घंटे तक मरीज को स्ट्रेचर के इंतजार में रहना पड़ा। वहीं अस्पताल की व्यवस्थाओं की पोल भी खुल गई। स्ट्रेचर को लेकर सिविल अस्पताल में यह कोई इकलौता विवाद नहीं है, बल्कि हर रोज ही मरीजों व स्टाफ में भिड़ंत होती हैं।