अमन के ताऊ सुधीर ने बताया कि छोटी सी उम्र में ही अमन ने बड़ा नाम कमाया है। वह भारत कुमार के अलावा विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भी विजेता रह चुके हैं। छोटी सी उम्र में ही कुश्ती की शुरुआत की थी। अमन के चचेरे भाई राकेश सहरावत ने बताया कि आज अमन ने कांस्य पदक जीतकर परिजनों के सपनों को साकार कर दिया है। आज गांव बिरोहड़ गांव को देश में नई पहचान मिली है। यह इतिहास स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया।
ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक का कहना है कि भारतीय पहलवान 2008 से अब तक रेसलिंग में कभी बिना मेडल नहीं आए। अमन सहरावत ने उसी परंपरा को कायम रखा है। अमन को कांस्य पदक जीतने पर बहुत-बहुत बधाई। साक्षी मलिक ने सोशल मीडिया पर मैच में जीत के बाद यह प्रक्रिया व्यक्त की।
कुश्ती में पदक जीतने की शुरुआत 2008 के बीजिंग ओलंपिक से हुई थी। इसमें सुशील कुमार ने कुश्ती में पदक दिलाया था। अमन वीरवार को सेमीफाइनल में जापान के शीर्ष वरीय रेई हिगुची से पराजित हो गए थे, लेकिन हिगुची के फाइनल में पहुंचने से अमन को रेपचेज में मौका मिला था, जिसमें उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और एक बार बढ़त लेने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।