पंचायत चुनाव की चक्कलस में प्रत्याशियों ने शनिवार की रात को सारे पत्ते खोलकर मतदान को अपने-अपने पक्ष में करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया। शाम होते ही उम्मीदवार हर दांव-पेंच आजमाने में लग गए। क्योंकि रविवार के बाद तो ऐसा मौका पांच वर्ष बीतने के उपरांत ही मिलेगा।
वोट के लिए कुछ स्थानों पर नोट के खेल की भी चर्चाएं जोरों पर रही। सरपंच, जिला परिषद व पंचायत समिति के उम्मीदवार रात भर अपने विरोधियों का खेल बिगाड़ कर चुनाव अपने पाले में करने में जुटे रहे। प्रत्याशियों के लिए वोटिंग शुरू होने के पहले के 12 घंटे किसी कयामत से कम नहीं रहे।
जहां कड़ा मुकाबला, उतनी ही ज्यादा खुशामद
झज्जर व बहादुरगढ़ खंड में गांव की चौधर के लिए रविवार को वोट पड़ने हैं। सरपंच, पंच, जिला पार्षद और पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ रहे व्यक्ति प्रचार के दौरान भली भंति जान गए हैं कि उनका चुनाव किस तरफ जा रहा है। कुछ प्रत्याशी तो मुकाबले में पिछड़ जाने के कारण जीतने वालों को समर्थन कर चुके हैं, वहीं जो प्रत्याशी कड़े मुकाबले मेे हैं वे पिछले 24 घंटे से वोटों के लिए खेल रहे हैं। क्षेत्र के 18-20 गांव ऐसे हैं, जहां मुकाबला चंद वोटों की जीत का है। इन गांवों में प्रत्याशियों के लिए शनिवार की रात बड़ी निर्णायक रही। वोट पाले में लाने के लिए वे जो कर सकते थे, पीछे नहीं हटे। दिन में जहां घर घर जाकर, खास कर अपनेे से नाराज लोगों को मनाने का अभियाल चला तो सायं से वोटरों के लिए मौज मस्ती का आलम रहा।
प्रत्याशियों के कंधे रहा सेवा का दायित्व
वैसे तो ग्राम पंचायत चुनाव में शराब का दौर चुनाव शुरू होते ही शुरू हो गया था। प्रशासन ने चुनाव को देखते हुए ठेकों को बंद करवा दिया है। लेकिन जानकारों की मानें तो प्रत्याशियों ने शराब बिक्री पर पाबंदी को देखते हुए पहले से ही पियक्कड़ों के लिये अंग्रेजी-देशी शराब की व्यवस्था पहले से ही करके स्टाक लगा रखा है। मतदाताओं के मोह ने प्रत्याशियों को पंगु बना दिया, जिसके चलते पर्चा दाखिले के बाद जिताऊ प्रत्याशी के लिये मतदाताओं की खिदमत और उनकी सारी सेवाओं का दायित्व प्रत्याशियों पर आ गया और वह भी मजबूरी में क्या न करते के पैटर्न पर आगे बढ़ना शुरू हो गये।