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साढ़े दस हजार प्रॉपर्टी टैक्स दिया, फिर घर पर चिपका दिया 1400 रुपये का नोटिस

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प्रापर्टी टैक्स के गलत मिले बिलों को ठीक करवाने के लिए नप आफिस में आए लोग। - फोटो : Bahadurgarh
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नगर परिषद की ओर से प्रापर्टी टैक्स के बिल भेजने और गलत बिलों को दुरुस्त करने के मामले में ढेरों गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। गलत बिलों को लेकर नागरिक परिषद कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। परिषद कार्यालय में हर रोज भीड़ लगती है। कई लोगों की सुनवाई तो होती ही नहीं, परिषद स्टाफ के रूखे व्यवहार का भी सामना करना पड़ता है।
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बराही रोड स्थित कॉलोनी मनमोहन नगर निवासी 80 वर्षीय बुजुर्ग विधवा ओमलता ने पैसों का उधार इंतजाम करके गत 28 मार्च को लंबी लाइन में लगकर 10730 रुपये के प्रापर्टी टैक्स बिल का भुगतान किया था। यह बिल वर्ष 31 मार्च 20201 तक था लेकिन उसके बाद 24 सितंबर को नगर परिषद द्वारा जारी नोटिस उनके घर के बाहर चिपका दिया गया। इसमें कहा गया था कि 1342 रुपये 30 सितंबर से पहले जमा करवा दें। यह देख ओमलता को धक्का लगा। वह बिल ठीक करवाने नप कार्यालय गई तो 1342 काटकर 1145 कर दिया और कहा बाहर जाकर जमा करा दे 30 के बाद करवाएगी तो 205 रुपये और देने पड़ेंगे। ओमलता के पुत्र ने कहा कि जब नगर परिषद को 31 मार्च तक का टैक्स दे दिया गया तो 6 महीने में कैसा टैक्स और वो भी 18 फीसदी ब्याज के साथ। जब 2010 से 2021 तक का सारा टैक्स जमा करवा दिया तो फिर दुबारा टैक्स क्यों लिया जा रहा है।
ओमलता व उनके बेटे ने कहा कि परिषद गलत कर रही है। उन्होंने नप के कार्यकारी अधिकारी से मिलने की कोशिश की तो उनके आफिस के बाहर बैठे कर्मचारियों ने मिलने नहीं दिया। ऑनलाइन टैक्स जमा करने की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि यूजर चार्ज के नाम पर एक बड़ी राशि शहर के नागरिकों से वसूली जा रही है जबकि कूड़ा उठाने वाला आता ही नहीं। सड़कों में कदम-कदम पर गड्ढे हैं, थोड़ी सी बारिश में ही गलियां नहर बन जाती हैं, सीवर जाम रहते हैं।
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ओमलता के पुत्र ने आरटीआई से पता लगाया है कि पिछले वर्ष नप ने एक कंपनी को 43 रुपये प्रति बिल की दर से बिल बांटने का ठेका दिया था। कंपनी ने 15 मार्च से 31 मार्च तक 6644281 रुपये कमाकर नगर परिषद की झोली में डाले थे। उन्होंने कहा कि अब यह कंपनी ग्राहकों को ऊल जलूल बिल भेजकर नगर निवासियों को चूना लगा रही है।
मेरी आजीविका का एकमात्र सहारा पेंशन है। मार्च 2021 में लिया उधार अभी तक नहीं चुका पाई हूं। नगर परिषद को गलत टैक्स दे दूंगी तो खाऊंगी क्या, इसलिए फिलहाल मैंने प्रापर्टी टैक्स न भरने का इरादा किया है। नगर परिषद में हो रही बंदरबांट से मुख्यमंत्री, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो व प्रधान मंत्री कार्यालय को अवगत करवाऊंगी। -ओमलता, मनमोहन नगर, बराही रोड, बहादुरगढ़
नप ने घरों के बाहर बिल या कोई नोटिस नहीं चिपकाया। अगर किसी बिल में संशोधन होता है तो संशोधन घर भेजा जाता है। घर में कोई रिसीव नहीं करता तो घर में छोड़ दिया जाता है। ओमलता के बिल में त्रुटि है तो वह परिषद आफिस आकर ठीक करवा सकती है। गलत होगा तो ठीक किया जाएगा। -संजय रोहिल्ला, ईओ, नगर परिषद, बहादुरगढ़।
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