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Jhajjar-Bahadurgarh News: मंडी में बारिश में भीगा पांच करोड़ का धान

Wed, 29 Nov 2023 01:24 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
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झज्जर। शहर में सोमवार देर रात हुई तेज बरसात से मंडियों में खुले में रखे लगभग 12 हजार धान के बैग भीग गए। ये धान प्राइवेट आढ़ती खरीद चुके थे। इनकी कीमत करीब पांच करोड़ रुपये है। मंगलवार को दिन भर आढ़ती और श्रमिक इन्हें सुखाने में लगे रहे।
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सोमवार रात तक हुई बरसात के चलते आढ़तियों व लेबर ने तिरपाल ढककर धान को बचाने का प्रयास किया, लेकिन उसके बावजूद हजारों क्विंटल धान बारिश की भेंट चढ़ गया। मंडी में करीब 50 किलोग्राम के करीब 5 हजार व 35 किलोग्राम के करीब 12 हजार बैग मंडी में पहुंचे थे। सोमवार शाम को हुई बारिश हुई तो धान को तिरपाल से ढककर बचाने का प्रयास किया गया लेकिन काफी धान भीग गया। कुछ बोरे काफी अधिक भीगे थे तो कुछ पर हल्का पानी लगा था। 35 किलोग्राम के करीब 9 हजार व 50 किलोग्राम के करीब तीन हजार बैग भीग गए। इसकी कीमत करीब पांच करोड़ रुपये के है। कुछ बैग काफी इसकी कीमत करीब पांच करोड़ रुपये है। मंगलवार को मौसम थोड़ा खुला तो आढ़ती और श्रमिक धान को बोरों से निकालकर सुखाकर बोरियों में भरने में लगे रहे।
जिले में हुई 7 लाख 26 हजार 720 क्विंटल धान की आवक हुई हैं। इनमें से करीब 6 लाख 47 हजार 293 क्विंटल धान का उठान हो चुका हैं। झज्जर की अनाज मंडी में एक लाख 53 हजार 225 क्विंटल, 5 लाख 42 हजार 736 के क्विंटल, मातनहेल की अनाज मंडी में 30 हजार 759 क्विंटल बासमती धान किसानों की ओर से लाया गया है। सभी मंडियों से 6 लाख 47 हजार 293 क्विंटल धान का उठान मिलर्स की ओर से कर लिया गया है। झज्जर की अनाज मंडी से एक लाख 39 हजार 465 क्विंटल धान का उठान हो चुका है। बेरी के अनाज मंडी में 4 लाख 84 हजार क्विंटल बासमती धान का उठान किया गया है। मातनहेल की अनाज मंडी में 23 हजार 728 क्विंटल धान का उठान मिलर्स की हुआ है।
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जिले की अनाज मंडियों में करीब 79 हजार 427 क्विंटल धान मंडी परिसर में पड़ा है। झज्जर की अनाज मंडी में करीब 13760 क्विंटल (27 हजार 520 बैग) बासमती धान अनाज मंडी परिसर में रखा हुआ है। इसमें से 12 हजार बैग बारिश में भीगे। इसके अलावा बेरी के अनाज मंडी में 58636 क्विंटल बासमती धान भी खुले में रखा हुआ है और 7031 क्विंटल धान मातनहेल की अनाज मंडी में खुले में रखा गया है। गौरतलब है कि हर साल बेमौसमी बारिश की भेंट गेहूं, बाजरा, धान की फसल चढ़ जाते हैं लेकिन सरकार की ओर से व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की जा रही हैं।
वर्जन
मंडी में बना टिन शेड काफी छाेटा है। इस कारण खरीद के बाद फसलों को खुले में रखना पड़ता है। बारिश में आढ़तियों को नुकसान होता है। मंडी में दुकान नंबर 55 के पास पानी जमा हो जाता है। वहां तीन से चार पंप सैट लगाने चाहिए। टिन शेड बड़ी होनी चाहिए।
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-हरेंद्र सिलाना, प्रधान आढ़ती एसोसिएशन झज्जर।
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