झज्जर। जिले की महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त हैं। इनके खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम मिल रही है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से चलाए जा रहे एनीमिया मुक्त अभियान के तहत चौकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले 10 दिन में 12 हजार से अधिक महिलाओं के खून की जांच की, इसमें 55.51 प्रतिशत बच्चियां, किशोरी और महिलाएं एनीमिया से पीड़ित मिली है।
जांच में सामने आया है कि 12 हजार में से 4,253 में हीमोग्लोबिन की मात्रा 7 से 9 ग्राम मिली है। इसके अलावा 2,340 में हीमोग्लोबिन की मात्रा 9 से 11 ग्राम मिली है। इसके अलावा 328 मरीज ऐसे मिले, जिनमें हीमोग्लोबिन की मात्रा 7 से भी कम मिली है। चिकित्सकों की मानें तो एनीमिया एक सामान्य चिकित्सीय स्थिति है, इसमें शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी) की संख्या में कमी या रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी देखी जाती है। हीमोग्लोबिन आरबीसी में मौजूद एक प्रोटीन है, जो फेफड़ों से पूरे शरीर में विभिन्न ऊतकों और अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का कार्य करता है। एनीमिया के कारण रक्त में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो सकती है, जिससे शरीर का समग्र स्वास्थ्य और कामकाज प्रभावित होता है।
एनीमिया के लक्षण
- थकान और कमजोरी
- त्वचा का पीला पड़ना
- दिल की धड़कन का असामान्य होना
- सांस लेने में तकलीफ
- सीने में दर्द के साथ चक्कर आना
- हाथों और पैरों का ठंडा पड़ना
- सिरदर्द
किस आयु वर्ग के कितनों की हुई जांच
6 माह से 59 माह-1753
5 से 9 साल-986
10 से 19 साल-1550
20 से 49 साल -2712
गर्भवती महिलाएं-1325
दूध पिलाने वाली महिलाएं-274
अन्य-3828
फ्रंट लाइन वर्कर-39
एनीमिया के प्रकार...
माइल्ड एनीमिया- इस प्रकार के एनीमिया में खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा 9 से 11 तक होती है जबकि महिलाओं में हीमोग्लोबिन की मात्रा 12 से 14 तक होनी चाहिए। अब तक हुई जांच में ऐसी 2324 बच्ची, किशोरी व महिलाएं मिली हैं।
माडरेट एनीमिया-इस प्रकार के एनीमिया में खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा 7 से 9 तक होती है। अब तक हुई जांच में ऐसी 4253 बच्ची, किशोरी व महिलाएं सामने आई हैं।
सीवियर एनीमिया सबसे घातक होती है। इसमें खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा 7 से भी कम होती है। इसमें कई बार खून भी चढ़ाना पड़ता है। जांच में ऐसी 328 बच्ची, किशोरी व महिलाएं मिली हैं।
पिछले 10 दिन में 12 हजार से अधिक बच्चों, किशोरियों, महिलाओं के खून की जांच की गई है। इसमें 50 प्रतिशत से ज्यादा एनीमिक मिली हैं। इनको दवा वितरित की गई हैं ताकि खून की मात्रा शरीर में ठीक हो सके।
- डॉ. भूपेश, नोडल ऑफिसर, एनीमिया मुक्त हरियाणा कार्यक्रम, झज्जर