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हमारी लड़ाई सरकार से ही नहीं, आर्थिक शक्तियों से भी : उगराहां

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बहादुरगढ़। यह लड़ाई केंद्र की भाजपा सरकार के साथ तो है ही लेकिन इससे भी बढ़ कर विश्व व्यापार संगठन, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और साम्राज्यवादी देशों के उन पूंजीपतियों के साथ है जो केंद्र सरकार की पीठ थपथपा रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के प्रधान जोगिंदर सिंह उगराहां मंगलवार को विद्रोही बीबी गुलाब कौर नगर की स्टेज से किसानों को संबोधित कर रहे थे।
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किसान नेता उगराहां ने कहा कि उपरोक्त आर्थिक शक्तियां अपने हितों की पूर्ति के लिए विकासशील और अविकसित देशों पर विकास के नाम पर अपनी नीतियां लागू करते हैं। इन्हीं ताकतों की नीतियों का लागू करने के लिए भारत की मोदी सरकार ने तीन नए कृषि कानून बनाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार से कानूनों के खिलाफ चल रही यह लड़ाई लंबी है। इन ताकतों के विरुद्ध लड़ने के लिए मानसिक तौर पर तैयार हो कर लड़ने की जरूरत है। सभी को धैर्य रखना होगा, जीत निश्चित है। इस जीत से समूचे किसानों को फायदा होगा।
नौजवान नेता सरबजीत मोड़ ने किसान संघर्ष को काम और शिक्षा के साथ जोड़ा। उन्होंने युवाओं को कहा कि भारत की सरकार जिस तरह खेती को उजाड़ने पर तुली हुई है। उसी तरह श्रम कानूनों और शिक्षा नीति में संशोधन करके कॉर्पोरेट घरानों के पक्ष में बना कर आने वाली पीढ़ी को ज्ञानरहित व रोजगारविहीन करने की कोशिश कर रही है। सरकार की इन जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध एकजुट होकर संघर्ष करने की जरूरत है।
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यूनियन के राज्य सचिव सिंगारा सिंह मान ने कहा कि बुधवार को बीबी गुलाब कौर नगर की स्टेज बंदा सिंह बहादुर सिंह के शहीदी दिवस को समर्पित होगी। दिल्ली से पहुंचे मजदूर प्रकोष्ठ के नेता पाला राम ने कहा कि यह लड़ाई अकेले किसानों की नहीं है। ये कानून लागू होते हैं तो मजदूरों पर भी इनका बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा। दिल्ली से आए बलजिंदर सिंह बाजवा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मजदूरों को राशन और दूसरी सुविधाएं मिलनी बंद हो जाएंगी। सभा का संचालन मनप्रीत बहोना ने किया। हरजीत सिंह, गुरदेव सिंह किशनपुरा, गुरतेज सिंह और गुरप्रीत सिंह नूरपुरा ने भी सभा में अपने विचार रखे।
कृषि कानून रद्द करने के लिए केंद्र सरकार को बाध्य करेंगे : नैन
बादली। भारतीय किसान यूनियन (घासीराम) के नेता जोगिंदर नैन ने ढांसा बॉर्डर पर पहुंचकर आंदोलनकारी किसानों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि किसानों ने जिस प्रकार टोहाना में अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे रद्द करने के लिए राज्य सरकार को बाध्य किया है, उसी प्रकार से तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए केंद्र सरकार को भी मजबूर करेंगे।
किसान नेता नैन ने कहा कि किसान एकजुट होकर तीनों कृषि कानूनों को रद्द करवाने में भरपूर सहयोग कर रहे हैं। किसानों की एकता ही उनकी असली ताकत है और इसी का परिणाम है कि किसानों के मुकदमे राज्य सरकार ने रद्द करने की बात मान ली है। उन्होंने कहा कि पहली जून से हम टोहाना में थे। टोहाना से जेजेपी विधायक देवेंद्र सिंह बबली ने किसानों को गालियां दीं और उल्टा किसानों पर ही गंभीर धारा 307 के तहत मुकदमा दर्ज करवाया। जबकि पुलिस कार्रवाई में यह धारा बनती ही नहीं थी। बिना किसी कारण पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज किया। आखिर संयुक्त किसान मोर्चा की एक कॉल पर प्रदेशभर से किसानों ने टोहाना थाने का घेराव किया और थाने के अंदर पशु बांधे। हरियाणा की बीजेपी व जेजेपी सरकार को बाध्य किया और बिना किसी शर्त किसानों को रात को ही छोड़ने पर मजबूर किया गया।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के सीएम ने पुलिस व प्रशासन पर किसान आंदोलन को तोड़ने का दबाव डाला। हमारा एक साथी रह गया था। आज उसको बाहर निकलवाकर उसके घर भेज दिया है। जिस तरह हमने राज्य सरकार को हराया है, उसी तरह केंद्र सरकार को हराना है। राज्य सरकार ने टोहाना में भारी पुलिस बल लगाए थे। सरकार को वहम था कि किसानों को खदेड़ देंगे, लेकिन हमने थाने के अंदर पक्का टेंट लगाया। केंद्र सरकार को तीनों कानून वापस लेने होंगे और एमएसपी की गारंटी देनी होगी। इस अवसर पर गुलिया खाप के प्रधान विनोद बादली समेत तमाम किसान मौजूद रहे।
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