बादली। राजकीय धीरपाल सिंह महाविद्यालय में एनएसएस शिविर में विशेषज्ञों ने स्वयं सेवकों जैविक खाद तैयारी करने के बारे में बताया। उन्हें बताया कि जैविक खाद से भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है।
जैविक खाद के प्रबंधनकर्ता कर्मबीर अग्रवाल, राजीव जैन और विकास गर्ग ने स्वयं सेवकों को बताया कि किसान अपनी फसल की अच्छी पैदावार के लिये विभिन्न तरह की रसायनिक खाद इस्तेमाल करते हैं। खेती में रसायनिक खादों के इस्तेमाल से फसल के साथ साथ मिट्टी की उर्वरक क्षमता पर भी असर पड़ता है। ऐसे में किसान जैविक उपचार अपनाकर अपनी फसल की पैदावार के साथ साथ जमीन की उर्वरता भी बढ़ा सकते हैं। उन्होंने जैविक खाद तैयार करने की विधी के बारे में बताया कि एक प्लास्टिक के ड्रम में गोबर (देशी गाय, भैंस का गोबर) डालकर इसमें गोमूत्र मिला लें फिर इसमें गुड़ (उपयोग में ना आने वाला गुड़) मिला लें। इसमें पिसी हुई दालों व लकड़ी का बुरादा डाल दें। आखिर में इस मिश्रण को एक किलो मिट्टी में सान लें। जैविक खाद बनाने के लिए 10 किलो गोबर, 10 लीटर गोमूत्र, एक किलो गुड, एक किलो चोकर एक किलो मिट्टी का मिश्रण तैयार करना चाहिए। इन पांच तत्वों को आपस में मिलाने के लिए हाथ से या किसी लकड़ी के डंडे की मदद लें। मिश्रण बन जाने के बाद इसमें एक से दो लिटर पानी डाल दें। अब इसे 20 दिनों तक ढक कर रख दें। यह खाद सूक्ष्म जीवाणु से भरपूर रहेगी खेत की मिट्टी की सेहत के लिए अच्छी रहेगी।