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नंदी के पेट से निकाली 100 किलो पॉलिथीन व लोहे की स्क्रैप

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---फोटो 7 : नंदी के पेट से निकाले गए पालिथीन और लोहे की स्क्रैप। - फोटो : Bahadurgarh
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सांस लेने में बेहद परेशानी महसूस कर रहे एक नंदी के पेट का ऑपरेशन कर गो-उपचार केंद्र सांखोल में डाक्टरों ने करीब 100 किलो पॉलिथीन व लोहे की स्क्रैप निकाली। अब इस नंदी की हालत में लगातार सुधार हो रहा है।
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विवेकानंद नगर में एक नंदी की हालत खराब होने की सूचना पर गोधन सेवा समिति की एंबुलेंस से नंदी को सांखोल गो-उपचार केंद्र लाया गया। नंदी के मुंह से लगातार पानी व लार बह रही थी। नंदी के पेट का सारा दबाव उसकी छाती पर आ रहा था और उसको सांस लेने में बेहद कठिनाई हो रही है। चिकित्सा टीम में डॉ. राहुल भारद्वाज (वीएस) ने अपनी वीएलडीए रवींद्र कुमार, रमेश, कृष्ण व ओम प्रकाश के सहयोग से नंदी का ऑपरेशन शुरू किया। करीब पांच घंटे चले इस सफल ऑपरेशन में नंदी के पेट से करीब 100 किलो पॉलिथीन, लोहे की स्क्रैप व सिक्के निकले। इस तरह नंदी की जान बचा ली गई।
डॉ. राहुल भारद्वाज ने बताया कि अगर इस नंदी को समय पर उपचार केंद्र नहीं लाया जाता तो कुछ समय बाद वह सड़क पर ही दम तोड़ देता। डॉ. राहुल ने बताया कि पॉलिथीन तो गोवंश की आंतों के लिए इस कद्र जानलेवा है कि इससे ये पशु तिल-तिल मरते हैं। पॉलिथीन गोवंश की आंतों में फंस जाती है। इससे इनका समूचा पाचन तंत्र गड़बड़ा जाता है। चारा पच नहीं पाता। शरीर में पॉलिथीन बढ़ने के साथ-साथ इनका पेट फूलता रहता है, जो अंत में इन गोवंश की असमय मौत का कारण बनता है।
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गोधन सेवा समिति के प्रधान रमेश राठी ने बताया कि हमारे द्वारा खाने की चीजों को पॉलिथीन में बांधकर सड़कों पर फेंक दिया जाता है। बेसहारा भूखा गोवंश पॉलिथीन समेत इन चीजों को खा जाते हैं। इस प्रकार धीरे-धीरे इन गोवंशों के पेट में यह पॉलिथीन बढ़ती जाती है और अंत में इनकी मौत का कारण बनती है। राठी ने लोगों से अपील की है कि वे खाने की चीजों को पॉलिथीन में बांधकर न फेंके। पॉलिथीन के प्रयोग को अपने जीवन में पूरी तरह बंद कर दें। बेसहारा गोवंश के लिए हम सभी को हरे चारे की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि भूखे बेसहारा गोवंश कूड़ा-कर्कट व पॉलिथीन खाने को विवश न हों। समिति सचिव बिजेंद्र राठी ने बताया कि प्राचीन समय से ही हमारे देश में हर घर में पहली रोटी गोवंश की बनाई जाती थी। लेकिन धीरे-धीरे हम अपनी इस परंपरा को भूल रहे हैं। अगर हर घर से एक रोटी गोवंश के लिए निकाली जाए तो बेसहारा गोवंश भूखा नहीं रहेगा।
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