शहर के अलग-अलग हिस्सों में सीवर मैनहोल खुले या फिर उनके ढक्कन टूटे हुए हैं। इन सीवरों के पास से निकलना खतरे से खाली नहीं। ये कई बार दुर्घटनाओं का कारण बन चुके हैं। नालों की स्थिति भी ऐसी ही है। रोहतक रोड, झज्जर रोड और रिहायशी कॉलोनियों में नाले खुले पड़े हैं। इन सबके बावजूद संबंधित विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा।
शहर में सड़क किनारे बने निकासी नाले भी कई स्थानों पर खुले हुए हैं। रोहतक-दिल्ली रोड, महावीर पार्क, नेहरू पार्क, झज्जर रोड पर बने निकासी नाले जगह-जगह से खुले हैं। रोहतक रोड पर दोनों ओर बना नाला काफी जगह से खुला है। यहां रोजाना हजारों लोग आते जाते हैं। भीड़भाड़ के कारण कई बार लोग नालों में गिरकर घायल हो चुके हैं। लोगों का कहना है कि सफाई करने के बाद यदि नालों को ढकवा दिया जाए, तो हादसों पर अंकुश लग सकता है। मगर संबंधित विभाग इस ओर ध्यान नहीं देता।
शॉप संचालक सुरेंद्र, सतबीर का कहना है दिल्ली-रोहतक रोड पर कई जगह खुले नाले पड़े हैं। यहां तक कि उनसे लंबे-लंबे लोहे के सरिये भी निकले हुए हैं। रात के समय यहां पर रोशनी की भी उचित व्यवस्था नहीं रहती। ऐसे में यदि इसमें कोई गिर जाता है तो उसकी जान जोखिम में पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि झज्जर मोड़ चौक के पास खुला पड़ा नाला बेहद खतरनाक है। जहां-जहां सीवर खुले रहते हैं, अक्सर वहां हादसे हो जाते हैं। सबसे अधिक खतरा बच्चों के लिए होता है। बच्चे खेलते-खेलते गिर जाते हैं।
राहगीर हरीश एवं विकास ने कहा कि सफाई कर्मी सीवरों की सफाई करने के बाद सीवरों को खुला छोड़ जाते हैं या फिर जल्दबाजी में अस्त-व्यस्त लगा जाते हैं। इस कारण ढक्कन टूट जाते हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जहां-जहां बरसाती व दूसरे नाले खुले पड़े हैं उनकी जल्द सफाई करवाई जाए और उसके बाद उन्हें कवर करवाया जाए, ताकि कोई चोटिल न हो सके। उन्होंने कहा कि खुले पड़े नालों में गंदगी भरी होने के कारण उनसे दुर्गंध उठती रहती है, जिससे लोगों के बीमार होने का भी भय बना रहता है। इसलिए नालों की सफाई कराई जाए।