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बिजली बंद करने से बिफरे लोग

Wed, 23 Sep 2015 12:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला बहादुरगढ़
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ओमेक्स सिटी में अचानक बिजली सप्लाई बंद किए से यहां के रेजिडेंट बिफर गए। उन्होंने बहुत महंगे बिल के बदले भी जनरेटर सुविधा नहीं देने पर हंगामा कर दिया।
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मामला बढ़ता देख पुलिस पहुंच गई और कंपनी अधिकारियों को जल्द समाधान के लिए कहा। रेजिडेंट्स ने कंपनी अधिकारियों पर सुविधाओं की एवज में मनमाने चार्ज लगाए जाने के आरोप भी मढ़े।

मंगलवार को ओमेक्स सिटी के टावरों में घंटों तक बिजली गुल रहने से हंगामा खड़ा हो गया। पंकज राठी, आरएन गुप्ता, रवि ओबराय, सोनू दलाल, हरिपाल ढुल, जोरावर, रीता श्रीवास्तव, पूनम खिलानी, अनुराधा श्रीवास्तव व मौसमी राय चौधरी आदि ने जेनरेटर सेवा देने की मांग की। यहां बिजली निगम की ओर से सप्लाई गुल हो जाती है तो कंपनी जनरेटर से सप्लाई करती है।
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इसके लिए लोगों को प्रति युनिट 15 रुपये से अधिक देने पड़ते हैं। निवासियों ने कहा कि आज बिजली गुल होने पर कंपनी की ओर से जेनरेटर चालू नहीं किया गया। जिससे टावरों में रहने वाले लोग अपने घरों में ही कैद से होकर रह गए। बीमारों को इलाज के लिए कई-कई मंजिलों से नीचे और नीचे से ऊपर लाना ले जाना मुश्किल हो गया। इससे गुस्साए लोगों ने सानवी के बिलिंग आफिस के बाहर इकट्ठे होकर कड़ा रोष जताया। मामला बढ़ता देख स्टाफ कार्यालय में ताला लगाकर खिसक गया।

बाद में थाना शहर प्रभारी ओमबीर सिंह व सेक्टर-6 चौकी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर गुस्साए लोगों को शांत किया और बिजली निगम के अधिकारियों से बात कर सप्लाई चालू करवाई। उन्होंने कंपनी अधिकारियों को भी समस्या समाधान के लिए कहा। कई रेजिडेंट्स ने कहा कि कंपनी मनमाने चार्ज वसूलती है, लेकिन सुविधा नहीं देती।

वे ज्यादा शुल्क नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि कभी अचानक बिजली काट दी जाती है तो कभी पानी की सप्लाई बंद कर दी जाती है। महिलाओं ने कहा कि यहां मेंटिनेंस के नाम पर नाजायज तरीके से चार्ज लिया जा रहा है।

बिजली गुल होने पर जनरेटर सुविधा समय पर नहीं दी जाती। जबकि करीब हर परिवार का बिजली का बिल 6 से 20 हजार से अधिक आ रहा है। कई महिलाओं ने कहा कि वे यहां फ्लैट मालिक होकर भी किराएदार बनकर रह गए हैं।

पहले बकाया दो
दूसरी ओर सर्विस प्रोवाइडर कंपनी सानवी के अधिकारी अमित बंसल ने बताया कि 441 रेजिडेंट्स ने मेंटिनेंस व बिजली बिल का 85 लाख रुपये अदा नहीं किया है। ऐसे में जनरेटर चलाने के लिए जब पैसे ही नहीं होंगे तो सुविधा किस तरह से दे पाएंगे। फिर भी लोगों को बेतहर सुविधाएं देने का प्रयास किया जाता है।
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