कृषि विभाग में दो साल पहले हुए एक
करोड़ सात लाख रुपये के घोटाले के मामले में विजिलेंस टीम को बृहस्पतिवार
को बड़ी सफलता मिली।
पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद बचे हुए आरोपियों
को पकड़ने के लिए कवायद तेज कर दी गई है। इस मामले में किसानों की शिकायत
के आधार पर जिला सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी नीना सहवाग के खिलाफ मुकदमा
दर्ज किया गया था।
उनके तबादले के बाद उनके स्थान पर आए सहायक भूमि संरक्षण
अधिकारी महाबीर गुलिया को भी आरोपी बनाया गया था। इनके अलावा एडीओ नरेंद्र
पिलानिया, जैन सिंह और धर्मबीर भी आरोपियों में शामिल हैं।
एग्रीकल्चर
इंस्पेक्टर बहादुर सिंह, बलबीर, जगबीर के अलावा धर्मपाल ट्रेजरर और
अकाउंटेंट सतप्रकाश भी घोटाले में शामिल थे।
कृषि विभाग ने लगभग तीन साल पहले किसानों के लिए एक विशेष योजना लागू की
थी। इस योजना का लाभ उन किसानों को मिलना था, जिनकी जमीन ऊबड़-खाबड़ थी और
नहरी पानी से सिंचाई नहीं हो पा रही थी।
योजना के तहत किसानों के खेतों में
पाइप लाइन और फव्वारा सेट लगाने थे, जिन पर विभाग ने किसानों को 50
प्रतिशत सब्सिडी देनी थी। जिले के 443 किसानों को योजना का लाभ मिलना था।
विभाग द्वारा योजना के लिए एक करोड़, 57 लाख, 44 हजार, 780 रुपये का बजट
निर्धारित किया गया था। मगर इसमें से एक करोड़ 7 लाख रुपये का अधिकारियों
ने ही घोटाला कर दिया। इसकी शिकायत जब किसानों ने अधिकारियों को दी तो 10
अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
बृहस्पतिवार
को विजिलेंस टीम ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को झज्जर बस स्टैंड से
गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान गुड़गांव निवासी
नरेंद्र, भिवानी निवासी जैन सिंह, डीघल निवासी जगबीर, सीसर निवासी बलबीर और
सांपला निवासी श्रीकृष्ण के रूप में हुई है।
इस योजना को क्रियान्वित करने का ठेका लख्मी इंटरप्राइजेज चरखी दादरी को
दिया गया था। फर्म संचालक संदीप गोयल ने किसानों से आवेदन लेकर उनके खेतों
में पाइप लाइन डलवा दी और फव्वारा सेट भी लगवा दिए।
मगर उसने पाइप लाइन और
फव्वारा सेट लोकल कंपनियों के लगाए, जबकि ये आईएसआई मार्का लगाने थे।
आईएसआई मार्का पाइप और फव्वारा सेट देने वाली कंपनियों के फर्जी बिल भी लगा
दिए गए। अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर उन फाइलों को पास करा लिया।
वहीं दूसरी ओर किसानों को मिलने वाली सब्सिडी भी उनको नहीं दी गई। संदीप
गोयल उन्हें यह कहकर बरगलाता रहा कि अभी विभाग की ओर से सब्सिडी राशि नहीं
आई है।
आते ही उनकी सब्सिडी उनके बैंक खातों में डाल दी जाएगी। सब्सिडी
नहीं मिली तो किसानों ने मामले की शिकायत की। शिकायत के आधार पर 27 जून,
2013 को इस मामले में फर्म संचालक सहित 19 लोगों पर केस दर्ज हो गया था।
जांच में सामने आया कि एक करोड़ 7 लाख रुपये का गबन किया गया था।
मुकदमा दर्ज होने के बाद जब मामले की जांच की गई तो 443 में से 296 किसानों
की फाइलें ही गायब मिलीं। इन किसानों से रुपये एेंठने के बाद उनकी फाइल ही
रिकॉर्ड से गायब कर दी गई।
फर्म संचालक संदीप गोयल को गिरफ्तार करने के
बाद उसने 38 लाख, 65 हजार, 964 रुपये विभाग के खाते में जमा करा दिए थे।
विजिलेंस इंचार्ज इंस्पेक्टर ओमप्रकाश शर्मा ने बृहस्पतिवार को ही झज्जर
में ज्वाइन किया था। इससे पहले वे करनाल में तैनात थे। ज्वाइन करने के कुछ
देर बाद ही उन्होंने इतने बड़े मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार करने
में सफलता हासिल की है।
लगभग दो साल पहले दर्ज हुए एक करोड़ से ज्यादा के घोटाले के मुकदमे में
विजिलेंस टीम ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को बस
स्टैंड से गिरफ्तार किया गया है। सभी हरिद्वार जाने की फिराक में थे। -इंस्पेक्टर ओमप्रकाश शर्मा, इंचार्ज झज्जर विजिलेंस