बहादुरगढ़। भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि तालाबंदी करना कोरोना महामारी को रोकने का सही समाधान नहीं है। लॉकडाउन से बेरोजगार बढ़ेगी और लोग भुखमरी से मर जाएंगे। इसलिए उनका संगठन पंजाब के शहरों में दुकानें खोलने का समर्थन कर रहा है।
दिल्ली की सीमाओं पर तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का धरना चलते हुए शनिवार को 162 दिन हो गए। कड़ी गर्मी होते हुए भी नयागांव चौक के पास बीबी गुलाब कौर नगर में हुई भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) की सभा में काफी संख्या में महिला व पुरुष किसान उपस्थित रहे। किसानों को खासतौर पर यूनियन के नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और पंजाब सरकार कोरोना के कारण तालाबंदी कर रही है। यह बीमारी का व्यावहारिक समाधान नहीं है। छोटे दुकानदार, मजदूर और काफी अन्य लोग कोरोना से पहले भुखमरी से मर जाएंगे। यही वजह है कि उनकी यूनियन तालाबंदी का विरोध कर रही है।
यूनियन नेता रूप सिंह चन्ना ने कहा कि ये कृषि कानून किसानों की जमीन हड़पने की प्रक्रिया को तेज करेंगे। यही कारण है कि भारत के अधिकांश राज्यों के किसान अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मोगा जिला के नेता अमरजीत सिंह सदोके ने कहा कि सरकारें पूंजीपतियों की कठपुतली हैं। इसलिए, वे हर काम उनके मुताबिक ही करती हैं। लेकिन सरकार का भ्रम है कि किसान संघर्ष छोड़ देंगे। हमारा संघर्ष शांतिपूर्ण है। पांच महीने में एक भी पत्ता नहीं गिराया गया। यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार कानून को रद्द नहीं करती। दरबारा सिंह छाजला जिला महासचिव संगरूर ने कहा कि पहले से ही हमारी सरकारों ने हमें फसलों के पूरे मूल्य नहीं दिए हैं और अब कॉरपोरेट घराने किसानों की तैयार फसल को अंधाधुंध तरीके से लूटेंगे, किसानों की आय घटेगी और किसान अपनी जमीन छोड़ देंगे। जिला संगरूर के बिट्टू मल्लन, जगसीर झुंबा और अन्य वक्ताओं ने भी सभा को संबोधित किया।