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पेट के कीड़े मारने की दवा खाने से नौ छात्राएं हुईं बीमार

Fri, 05 Sep 2014 12:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,झज्जर-बहादुरगढ़
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सोनीपत की ऋषि कॉलोनी में पेट के कीड़े मारने की दवा खाने से एक ही परिवार के तीन बच्चों की मौत के मामले की जांच अभी पूरी भी नहीं हुई कि बृहस्पतिवार को झज्जर में यही दवा खाने से नौ छात्राओं की हालत बिगड़ गई।
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पेट में दर्द की शिकायत के बाद इन छात्राओं को तुरंत सामान्य अस्पताल ले जाया गया। यहां उपचार देकर करीब तीन घंटे चिकित्सीय निगरानी में रखने के बाद सभी छात्राओं को छुट्टी दे दी गई। स्वास्थ्य विभाग ने दवा के सैंपल भरकर जांच के लिए भेज दिए हैं। जांच पूरी होने तक दवा खिलाने पर रोक लगा दी गई है।

दुल्हेड़ा के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की छात्राओं को दोपहर 12 बजे पेट के कीड़े मारने की दवा खिलाई गई। अभी दवा का सेवन किए आधा घंटा ही गुजरा था कि दो छात्राओं को उल्टी हो गई। इसके बाद सात अन्य छात्राओं के पेट में दर्द होने लगा।
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छात्राओं के चिल्लाने की आवाज सुनकर शिक्षकों के भी हाथ पांव फूल गए। मौके पर मौजूद डॉक्टरों की टीम ने छात्राओं का निरीक्षण किया।

उनकी हालत बिगड़ते देख तुरंत एंबुलेंस कंट्रोल रूम को सूचित कर दिया गया। इसके बाद एंबुलेंस में सभी छात्राओं को करीब दो बजे सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उन्हें तुरंत आपातकालीन सेवाओं के तहत उपचार दिया गया। सूचना मिलने पर छात्राओं के परिजन भी अस्पताल पहुंचे।

अस्पताल में डॉक्टरों ने यहां पहुंचे शिक्षकों और परिजनों को आश्वस्त किया कि छात्राओं की स्थिति सामान्य है। कुछ देर चिकित्सीय निगरानी में रखने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी जाएगी। डॉक्टरों के इस आश्वासन पर परिजन थोड़ा शांत हुए। करीब तीन घंटे चिकित्सीय निगरानी में रखने के बाद शाम पांच बजे सभी छात्राओं को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।


ये छात्राएं हुई बीमार
दवा खाने के बाद जिन छात्राओं के पेट में दर्द की शिकायत की, उनमें बारहवीं की ज्योति पुत्री सतपाल, छठी कक्षा की प्रिया पुत्री राजेश, नीतू पुत्री राजेंद्र, कक्षा सातवीं की अंशु पुत्री कृष्ण के अलावा कक्षा छठी की राखी पुत्री राजेश, नेहा पुत्री नरेश, नेहा पुत्री सुरेश, मोनिका पुत्री बिजेंद्र व मोनिका पुत्री आजाद हैं।

छात्रा ज्योति ने बताया सुबह खाना खाने के बाद स्कूल में डाक्टरों द्वारा दी गई गोली खाई थी। इसके बाद अचानक पेट में दर्द शुरू हो गया था। स्कूल शिक्षिका अनीता ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छठी से बारहवीं कक्षा तक के बच्चों को कीड़े मारने की गोलियां दी जा रही हैं।

गोली खिलाने के बाद नौ बच्चों ने पेट में दर्द की शिकायत की, जिसके बाद उन्हें तुरंत एंबुलेंस बुलाकर सामान्य अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया।


दवा के सैंपल लिए गए
सिविल अस्पताल में बतौर एसएमओ कार्यरत डॉ. सतेंद्र वशिष्ठ ने बताया कि दुल्हेड़ा गांव में करीब 400 बच्चों को पेट के कीड़े मारने की दवा दी गई थी।


इनमें से नौ छात्राओं ने पेट दर्द की शिकायत की है। संभवतया: छात्राओं ने खाली पेट दवा का सेवन किया होगा, जिस कारण यह परेशानी आई। फिलहाल सभी छात्राओं को उपचार के बाद छुट्टी दी जा चुकी है। दवा के सैंपल लिए जा रहे हैं। जांच के बाद कोई चूक मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।

तो क्या हो
छात्राओं को वक्त रहते अस्पताल पहुंचाने के कारण ही उनकी हालत में तेजी से सुधार हुआ। अगर मौके पर चिकित्सकों की टीम मौजूद नहीं होती तो उनकी हालत गंभीर भी हो सकती थी।

बता दें कि सीएचसी बादली की यह चिकित्सीय टीम बच्चों को कीड़े मारने की दवा खिलाने नहीं, बल्कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य योजना के तहत रुटीन चेकअप के लिए पहुंची थी।

 
छात्राओं की हालत बिगड़ी तो शिक्षकों के हाथ पांव फूल गए थे। ऐसे में चिकित्सक ही थे, जिन्होंने उनकी जांच कर जल्द से जल्द सिविल अस्पताल पहुंचाने का निर्णय लिया था।  

क्या कहते हैं सीएमओ
स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्कूलाें में बच्चों के पेट के कीड़े मारने के लिए दवा भिजवाई जाती है। दवा खिलाने का काम शिक्षक ही करते हैं। इस दवा का कोई रिएक्शन नहीं होता तथा न ही साइड इफेक्ट होता है।
डॉ. रमेश धनखड़, सीएमओ

दवा देने पर लगाई रोक
ड्रग इंस्पेक्टर से इस दवा के सैंपल भरवा दिए गए हैं। इसके अलावा वेयर हाउस में रखी दवा के सैंपल भी चैक किए गए हैं। फिलहाल दो-तीन दिन के लिए दवा देने को रोक दिया गया है। सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद अभियान को जारी किया जाएगा।
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डॉ. कुमुद शर्मा, डिप्टी सीएमओ




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