झज्जर। जिला प्रशासन की तरफ से सर्दी को देखते हुए तीन जगहों पर रैन बसेरे बनाए हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में इनमें कोई नहीं पहुंच रहा। ये सूने हैं और लोग सड़कों पर खुले में रात गुजराने को मजबूर हैं। कडाके की ठंड में ये ठिठुर रहे हैं। इनमें कई मासूम बच्चे भी हैं। रैन बसेरों के बारे में जब इनसे पूछा गया तो उन्हें रैन बसेरों की जानकारी नहीं थी।
अनाज मंडी में शेड के नीचे सोने को मजबूर हैं। यहां बडे़ ही नहीं बल्कि छोटे-छोटे बच्चे हैं, जो खुले आसमान या शेड के नीचे सोते हैं। रेडक्रास में बने रैन बसेरे में चौकीदार न होने की स्थिति में दो दिन पहले ही रेडक्रास ने अपने कर्मचारी की ड्यूटी यहां लगाई है। यह रैन बसेरा भी शाम होत ही बंद पड़ा हुआ था। रेडक्रास, रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर बने रैन बसेरों में सुविधाएं तो सभी है, लेकिन लोगों की पहुंच से दूर होने के कारण यहां लोग नहीं आते हैं। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर आने वाले यात्री लेट होने पर इनका प्रयोग कर पाते हैं। यदि शहर में फंसे किसी व्यक्ति को इन रैन बसेरे में जाने की जरूरत हो तो वह नहीं पहुंच पाते, क्योंकि बस अड्डा और रेलवे स्टेशन दोनों ही शहर से बहुत दूर है। इन रैन बसेरों में बिस्तर, बेड, रजाई व अन्य सभी चीजें उपलब्ध हैं, लेकिन यहां रुकने के लिए इस सर्दी में अब तक कोई नहीं आया है।
रेडक्रास रैन बसेरा
रात आठ बजे रेन बसेरे का गेट बंद था। बाहर रेहड़ी पर खड़ा चाैकीदार टीम को अंदर ले गया। अंदर कोई नहीं था। रैन बसेरा सूना था। महिला और पुरुषों के अलग अलग कमरे थे। उनमें रजाई गददे थे लेकिन कोई नहीं था।। चौकीदार ने बताया कि वह नवंबर में यहां ड्यूटी देने आया था। उसके बाद बीमार पड़ गया। अब दो दिन पहले आया है, लेकिन तब से अब तक कोई रात को यहां रुकने नहीं आया। रजिस्टर में भी कोई इंट्री नहीं थी।
बस स्टैंड रैन बसेरा
बस अड्डा पर भी रैन बसेरा बनाया गया है। यहां पर हम मौके पर पहुंचे तो कोई रुकने वाला नहीं दिखा। रजिस्टर चेक किया गया तो उसमें भी कोई एंट्री नहीं मिली। कर्मचारियों ने बताया कि अब यहां रुकने के लिए कोई नहीं आया है।
अनाज मंडी में खुले आसमान के नीचे सो रहे लोग
नई अनाज मंडी में सैकड़ों प्रवासी मजदूर खुले आसमान या शेड के नीचे रात को सोने रहे थे। किसी के पास रजाई थी तो किसी पर कंबल लेकिन ठंड इतनी ज्यादा थी कि ये लोग बार-बार उसमें लिपटने की कोशिश कर रहे थे। इनमें कई एक साल से 10 साल तक के छोटे बच्चे भी थे। जब यहां सो रहे लोगों से पता किया तो उन्होंने बताया कि उन्हें रैन बसेरों के बारे में जानकारी ही नहीं है।
वर्जन
तीन जगहों पर रैन बसेरे बनाए गए हैं। रेडक्रास में नगर परिषद ने चौकीदार देना था, लेकिन नहीं आया। इसलिए रेडक्रास कर्मचारी की ड्यूटी रात में लगाई गई है। बाकी दोनों जगह बस अड्डा व रेलवे स्टेशन पर उनके कर्मचारी रहते हैं। हमारी तरफ से कंबल, रजाई व अन्य सामान दिया गया है।
विकास कुमार, सचिव, रेडक्रास सोसायटी, झज्जर