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Jhajjar-Bahadurgarh News: न बच्चे की जांच हुई, प्रमाण पत्र भी नहीं बने

Thu, 25 Jul 2024 05:55 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
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झज्जर। स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एनएचएम कर्मचारियों ने बुधवार को सरकार के प्रति अपनी मांगों को लेकर नाराजगी जताते हुए दो घंटे का वर्क सस्पेंड रखा और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। हड़ताल के चलते मरीजों को परेशानी हुई। दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आए मरीजों को दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
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एनएचएम के तहत लगे आयुर्वेदकि, होम्योपैथी चिकित्सकों ने भी ओपीडी नहीं की। इसके अलावा क्लीनिक मनोविज्ञानिक काउंसिलिंग, डीआईसी, मोबाइल हेल्थ टीम, मेंटल हेल्थ टीमों ने भी दो घंटे तक काम नहीं किया। एसएनसीयू व लेबर में तैनात एनएचएम नर्सिंग स्टाफ भी हड़ताल पर रही। उनकी जगह पर स्वास्थ्य विभाग ने नियमित नर्सिंग स्टॉफ की ड्यूटी लगाई हुई थी। केवल एंबुलेंस की आपातकालीन सेवाएं जारी रखी गई। एनएचएम कर्मचारी संघ जिला प्रवक्ता संदीप कुमार जांगड़ा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से काम कर रही हैं, लेकिन सरकार ही ओर से हमारी लंबित पड़ी मांगों काे लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। एनएचएम कर्मचारी 24 जून से लगातार विरोध कर रहे है। सरकार के साथ बातचीत की गई, लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया। इसी को लेकर आज हरियाणा भर के एनएचएम कर्मचारियों ने 2 घंटे का पेन डाउन का वर्क सस्पेंड किया है। 26 जुलाई से बड़े आंदोलन की तैयारी शुरू हो जाएगी। एनएचएम कर्मचारी संघ हरियाणा के जिला अध्यक्ष अरुण वर्मा ने बताया कि एनएचएम कर्मचारी 25 से 30 सालों से कार्यरत कर्मचारी अपनी सेवाओं को लेकर सजग एवं समर्पित है, लेकिन सरकार का उनके प्रति कोई रुझान नहीं है एवं उनकी मांगों पर कोई विचार नहीं किया जा रहा।

मैं अपने बेटे की जांच करवाने सिविल अस्पताल में आई थी। कार्ड बनवाने के मुझे पता चला कि मुझे 59 नंबर कमरे में बेटे की जांच करवानी है। वहां पहुंची तो कोई कर्मचारी नहीं मिला। 12 बजे तक इलाज ही नहीं हुआ।आसपास में पूछा तो पता चला कर्मचारी हड़ताल पर हैं और इलाज 12 बजे के बाद होगा।
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बबीता, गांव जसौर खेड़ी

आज सुबह से 10 बजे अपनी लड़की का दिव्यांगता का प्रमाण पत्र का नवीनीकरण करवाने आया था। 10 बजे से चक्कर लगा रहा हूं, लेकिन काम नहीं हुआ। काफी देर तक इंतजार किया, लेकिन कोई डॉक्टर भी नहीं मिला।
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बिजेंद्र, गांव करनाला, बहादुरगढ़


बच्चे का प्रमाण पत्र बनवाना था। वह सुबह सात बजे अस्पताल आई थी, लेकिन पांच घंटे बाद भी बच्चे की जांच नहीं हुई।
ज्योति, साल्हावास
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