बहादुरगढ़। नवरात्र में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा कर व्रत रखे जा रहे हैं। जो लोग पूरे नौ दिन तक व्रत नहीं रख पाते हैं वे भी दुर्गाष्टमी का व्रत रखते हैं और कंजक पूजा करते हैं। इस पर्व में माता दुर्गा की अष्टमी और नवमी पर विशेष पूजा होती है। 11 अक्तूबर को अष्टमी के दिन सुकर्मा योग बन रहा है। 12 अक्तूबर को ही नवमी पूजन के बाद दशहरा पूजन किया जाएगा।
ज्योतिषाचार्य लालचंद कॉलोनी वासी रमेश भगत ने बताया कि अष्टमी तिथि शुक्रवार को सूर्याेदय से दोपहर 12:07 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि शनिवार को सुबह 11 बजे तक रहेगी। ऐसे में अष्टमी पूजन शुक्रवार को और शनिवार को नवमी पूजन होगा। उन्होंने बताया कि सुकर्मा योग में मां दुर्गा की पूजा करने साधक को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। शनिवार को अगर महानवमी पूजन करते हैं तो इस दिन श्रवण योग रहेगा। यह शक्ति के साथ शिव का भी संकेत है। इस दिन किया गया पूजन चारों पुरुषार्थों को देने वाला
होगा।
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इन तिथियों में ये होगा पूजन
-दुर्गाष्टमी : शुक्रवार दोपहर 12:07 बजे तक।
-महानवमी : शनिवार को सुबह 11 बजे तक।
-दशहरा पूजन : शनिवार को 11 बजे के बाद होगा।
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अष्टमी पर महागौरी की पूजा
अष्टमी पर मां दुर्गा के आठवें रूप महागौरी का पूजन किया जाता है। सुबह महागौरी की पूजा के बाद घर में 9 कन्याओं और एक बालक को आमंत्रित किया जाता है। इनकी पूजा के बाद उन्हें हलवा, पूरी और चने का भोग दिया जाता है। इसके अलावा उपहार देकर विदा किया जाता है। कन्या पूजन के दिन सुबह स्नान कर भगवान गणेश और महागौरी की पूजा करें। कन्या पूजन के लिए दो साल से दस साल तक की नौ कन्याओं और एक बालक को बटुक भैरव के रूप में आमंत्रित करें।