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नर्मदा बचाओ आंदोलनकारियों ने टीकरी बॉर्डर पर किया प्रदर्शन

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टीकरी बॉर्डर पर प्रदर्शन करते नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ता। संवाद - फोटो : Bahadurgarh
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बहादुरगढ़। रविवार को जानलेवा शीतलहर में भी किसानों के टीकरी बॉर्डर - बहादुरगढ़ पड़ाव में आंदोलनकारियों ने जगह जगह प्रदर्शन लिए। सरकार के खिलाफ दिनभर कहीं न कहीं गगनभेदी नारे गूंजते रहे। मध्यप्रदेश से नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़े ग्रामीण भी टीकरी बॉर्डर पहुंचे। प्रदर्शनों में महिलाओं की भी खासी भागीदारी रही। कई किसान महिलाएं खुद ही ट्रैक्टर चलाती हुई बॉर्डर पहुंची।
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बहादुरगढ़ में पकौड़ा चौक पर भारतीय किसान यूनियन (एकता), ष्ठड्डद्मड्डह्वठ्ठस्रड्ड से जुड़े काफी युवा किसानों ने जमकर नारेबाजी की। इन युवाओं की अगुआई कर रहे जस्सा सिंह ने कहा कि हम अपनी मांगें मनवाने के लिए जान की बाजी लगाने का तैयार हैं। हम अपने घर और खेती के काम छोड़कर अपने घर से सैकड़ों मील दूर कड़ी ठंड में बैठने पर मजबूर हैं, सरकार चाहे जितने अत्याचार कर ले, अगर मांगें नहीं मानी तो हम 26 जनवरी को अपने ट्रैक्टरों से दिल्ली में घुसेंगे और गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होंगे।
टीकरी बॉर्डर पर दिनभर चले प्रदर्शनों के अलावा सेक्टर -9 के साथ बाईपास पर खेती बचाओ संघर्ष समिति हरियाणा से जुड़े किसानों ने प्रदर्शन किया। नए बस अड्डे के पास भाकियू (राजेवाल) ने नारेबाजी करके सरकार से तीनों कृषि कानून वापस लेने और हमेशा के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य देना सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाने की मांग की। शहर में सेक्टर - 9 मोड़ पर हुई किसानों की सभा को आल इंडिया कृषक खेत मजदूर संगठन के नेता जय करण ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि देश की नरेंद्र मोदी सरकार का जन कल्याण से कोई सरोकार नहीं है। ये सरकार केवल अंबानी और अदानी जैसे पूंजीपति घरानों के लिए काम कर रही है। इन्हीं घरानों पर पूंजीपतियों का कब्जा करवाने के लिए किसानों की बलि देकर भी तीनों कानूनों को वापस नहीं लेना चाहती। किसान सेवा समिति दिल्ली से जुड़े नरेश कुमार लोगों आल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन से जुड़े युवाओं ने भी सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया।
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