बहादुरगढ़। शहर को जलभराव से बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने पांच किमी लंबी मुंगेशपुर ड्रेन के सुधार की तैयारी शुरू कर दी है। इसमें करीब 2.70 करोड़ रुपये खर्च होंगे। ड्रेन के दोनों ओर के किनारों को मजबूत बनाया जाएगा। इस काम को चार माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष बारिश के मौसम में बहादुरगढ़ में भारी जलभराव की स्थिति बन गई थी। मुंगेशपुर ड्रेन के किनारे टूटने और ओवरफ्लो होने से शहर के कई इलाके पानी में डूब गए थे। हालात इतने गंभीर हो गए थे कि राहत और बचाव कार्य के लिए सेना तक बुलानी पड़ी थी।
इसी अनुभव को देखते हुए इस बार सिंचाई विभाग ने समय रहते कदम उठाए हैं। सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता इशान सिवाच का कहना है कि ड्रेन की गहराई बढ़ाने, सिल्ट हटाने और किनारों को पक्का करने से जल निकासी बेहतर होगी।
शहर को बाढ़ जैसी स्थिति से राहत मिलेगी। दो करोड़ 70 लाख रुपये की लागत से ड्रेन की सफाई करने व किनारे मजबूत करने का कार्य किया जाएगा। टेंडर लगा दिया है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद काम जल्द शुरू होगा।
मुंगेशपुर ड्रेन ही बनी थी जलभराव का कारण
दरअसल, सितंबर 2025 में शहर के छोटूराम नगर, एमआईई पार्ट बी, विवेकानंद नगर, सेक्टर छह, सेक्टर दो, सेक्टर सात, मांडौठी बाजार, झील मोहल्ला समेत कई इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई थी। खासकर मुंगेशपुर ड्रेन के ओवरफ्लो होने से हालात बेकाबू हो गए थे। ड्रेन की सफाई न होने और किनारे जर्जर होने की वजह से शहर में जलभराव हुआ था। सेना बुलानी पड़ी लेकिन हालात फिर भी करीब एक माह तक काबू में नहीं आए थे। इस घटना के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे और समय रहते नालों व ड्रेन की सफाई की मांग तेज हो गई थी।
काम धंधा हो गया था चौपट
मुंगेशपुर ड्रेन ओवरफ्लो होने से कई कॉलोनियों में दो से तीन फीट पानी भरा गया था। लोग घरों में कैद होने पर मजबूर हो गए थे। लोगों का काम धंधा पूरी तरह चौपट हो गया था। लोगों को 800 मीटर गंदे पानी में चलकर अपने काम पर जाना पड़ा। छोटूराम नगर में लोगों की दुकान में रखा सारा सामान खराब हो गया था। करीब 500 से 700 परिवार यहां से पलायन कर रिश्तेदारों के घर चले गए थे।
सोनीपत के गांव मंडोरा से शुरू होती मुंगेशपुर ड्रेन
मुंगेशपुर ड्रेन सोनीपत के गांव मंडोरा से शुरू होती है। यहां से फिरोजपुर बांगर और फिर दिल्ली के गांव मुंगेशपुर, कंझावला और निजामपुर से होते हुए बहादुरगढ़ के गांव परनाला की तरफ से शहर में प्रवेश करती है। बहादुरगढ़ में इसकी लंबाई करीब पांच किलोमीटर है। शहर के छोटूराम नगर, विवेकानंद नगर, सेक्टर 9 बाईपास और एमआईई क्षेत्र से दिल्ली के गांव झाड़ौदा में प्रवेश कर जाती है। यह ड्रेन नजफगढ़ ड्रेन में मिलती है। इस ड्रेन की क्षमता बहादुरगढ़ एरिया में 2680 क्यूसिक पानी की है लेकिन बरसात के चलते ड्रेन में 3500 क्यूसिक से ज्यादा पानी बह रहा था।