करोड़ों रुपये की लागत से तैयार स्थानीय लघु सचिवालय में वीआईपी वस्तुओं को छोड़कर अन्य जन सुविधाओं के रखरखाव पर किसी का ध्यान नहीं है। जिसके कारण शुक्रवार को लिफ्ट में फंसी चार लोगों की जान पर बन आई। घटना की सूचना मिलने पर एक पुलिस जवान ने लिफ्ट कंट्रोलर को सूचना दी। जिसके बाद चाभी से लिफ्ट का दरवाजा खोल कर चारों को बाहर निकाला गया। इतना ही नहीं बल्कि करोड़ों की लागत से तैयार हुए लघु सचिवालय में अन्य सुविधाओं का भी जनाजा निकला हुआ है।
इस बारे में जानकारी देते हुए दादरी तोय निवासी मंजीत ने बताया कि अपने तीन साथियों के साथ किसी निजी कार्य को लेकर लघु सचिवालय आया था। कई दिनों से बुखार के कारण बीमार होने की वजह से उसने नीचे उतरने के लिए लिफ्ट का प्रयोग किया, लेकिन लिफ्ट का दरवाजा बंद होने के बाद खुला ही नहीं। उसने कहा कि लिफ्ट एक ही स्थान पर खड़ी रही। काफी कोशिशों के बाद भी हालात जस के तस बने रहे। लिफ्ट के अंदर लगे आपातकालीन अलार्म का प्रयोग करने पर कोई सहायता नहीं मिल पाई। आधे घंटे तक लिफ्ट में फंसे रहने के कारण दम घुटने लगा। तभी एक पुलिस जवान को इसकी सूचना मिली तो उसने लिफ्ट कंट्रोलर को बुलाकार चाभी से लिफ्ट का दरवाजा खुलवाया। चारों लड़के लिफ्ट में फंसे होने के कारण बाहर आने पर काफी देर तक हांफते रहे। लघु सचिवालय में काम करने वाले कर्मचारियों का कहना था कि लिफ्ट दो महीने से खराब पड़ी हुई है, लेकिन इस पर कोई ध्यान देने वाला ही नहीं है। लिफ्ट की काफी दिनों से सर्विस न होने के कारण इस प्रकार की समस्याएं आती हैं।
शौचालयों में भी व्यवस्था चरमराई
एक लिफ्ट ही नहीं बल्कि लघु सचिवालय में आमजन के लिए दी गई अन्य सुविधाओं की व्यवस्था भी चरमराई हुई है। पानी की निकासी ना होने के कारण गंदा पानी ओवरफ्लो हो जाता है जिसके कारण उसे प्रयोग करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बाथरूम में लगी नलियां व टूटियां जिनमें से काफी सारी खराब हो चुकी हैं तो कुछ हैं ही नहीं, लेकिन न तो इस प्रकार की अव्यवस्थाओं को सुधारने की कोशिश की जा रही है और न ही आमजन की किसी अधिकारी को कोई परवाह नहीं है।