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नवदंपती ने किसान आंदोलन के लिए भेंट की विवाह में मिली शगुन राशि

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अपने विवाह की शगुन राशि टीकरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन के लिए भेंट करते मानसा के बलजीत सिंह और मनवी? - फोटो : Bahadurgarh
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बहादुरगढ़। कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे किसान आंदोलन में अब लोग अपने-अपने तरीके से सहयोग कर रहे हैं। कोई अपने घर से दूध-दही-लस्सी लेकर आ रहा है, कोई सब्जी, कोई अनाज, कोई लकड़ी आदि ईंधन लेकर आ रहा है। नकदी के रूप में कई लोग अपना एक महीने का वेतन, कोई एक दिन का वेतन दान कर रहा है। दो व्यक्तियों ने अपने घर में पुत्र जन्म की खुशी में नकद राशि दान की। कई लोग विवाह की खुशी में आंदोलन के लिए नकद राशि भेंट कर रहे हैं।
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शुक्रवार को पंजाब के मानसा से टीकरी बॉर्डर आए बलजीत सिंह और मनवीर कौर ने अपनी शादी में मिली पूरी शगुन राशि आंदोलन में सहयोग देने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा को सौंप दी। बॉर्डर पर किसानों की सभा के मंच पर धरना संचालकों ने यह राशि ग्रहण की। नवविवाहिता मनवीर कौर ने कहा कि अपनी शगुन राशि को किसानों के लिए भेंट करके सुखी जीवन का आशीर्वाद लिया है। आंदोलन की सफलता से किसानों का भला होगा, और किसानों के भले से ही हम सबका भला होगा। मनवीर कौर के पति बलजीत सिंह ने कहा कि खेती की सफलता में ही हमारी खुशी है।
पंजाब के बुढ़लाडा निवासी सुरजीत सिंह आंदोलन की तीन महीने की अवधि में टीकरी बॉर्डर धरने में 32 दिन भाग ले चुके हैं। इस बीच उनके घर में पौत्र का जन्म हुआ तो वह टीकरी बॉर्डर के पास किसानों के पड़ाव में ठहरे हुए थे। घर से फोन पर खुशी की खबर मिली तो तुरंत बहादुरगढ़ के बाजार से 11 किलो लड्डू खरीद कर किसान-मजदूरों में बांटे। श्रीमुक्तसर साहिब के एक किसान जत्थे के वॉलंटियर सुखविंदर सिंह दो बेटों के बाद बेटी के पिता बने तो पत्नी अमनप्रीत कौर को मायके से मिले आधे से अधिक कपड़े और मिठाई टीकरी बॉर्डर धरने पर आंदोलनकारियों को बांट दिए। सुखविंदर ने कहा कि आंदोलनकारियों के साथ साझा करने से उनकी खुशी दोगुनी हो गई।
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टीकरी बॉर्डर आए सिरसा के प्रदीप व उनके चार साथी श्रमिकों ने बताया कि उन्होंने अपनी एक दिन की दिहाड़ी से भारतीय किसान यूनियन के 50 झंडे खरीदे और किसानों के ट्रैक्टरों पर लगाए। प्रदीप के साथी रविंदर सिंह ने कहा कि वे जमीन के मालिक नहीं हैं। खेतों में मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। दाल-रोटी चल रही है। लेकिन जब कृषि कानूनों की वजह से किसानों की खेती ही खतरे में रहेगी तो हमारा गुजारा भी संभव नहीं होगा। बेशक हम मजदूरी ही करते हैं, लेकिन किसान ही संकट में हमारी मदद करते हैं।वीर कौर।
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