टीकरी बॉर्डर पर पंजाबी गायक बब्बू मान के साथ सेल्फी लेते प्रशंसक।
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बहादुरगढ़। तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर टीकरी बॉर्डर पर किसानों का धरना शनिवार को 24वें दिन भी जारी रहा। पंजाब से काफी संख्या में किसानों के नए जत्थे धरने पर पहुंचे और काफी संख्या में किसान अपने घरों के लिए निकल गए। अभिनेत्री गुल पनाग और बब्बू मान समेत कई बड़े पंजाबी कलाकारों ने टीकरी बॉर्डर पहुंचकर किसानों को समर्थन दिया। रविवार को आंदोलनकारी किसान शहीदी दिवस मनाएंगे। इस मौके पर उन किसानों को श्रद्धांजलि दी जाएगी, जिनका आंदोलन के दौरान निधन हो गया।
बब्बू मान ने कहा कि भाजपा सरकार ने ये तीन कानून बनाकर किसानों का भला नहीं किया। अगर भले की बात हो तो किसान इन कानूनों को रद्द करने की मांग नहीं करते। जब किसान इन कानूनों को चाहते ही नहीं तो सरकार जबरन क्यों थोपना चाहती है। मान ने बॉलीवुड के पंजाबी अभिनेताओं को किसान हितैषी नहीं बताया। उन्होंने कहा कि मुंबई वाले अभिनेता किसानों को अपना दुश्मन मानते हैं। गायक हर्फ चीमा, कंवर ग्रेवाल और सोनिया मान भी शनिवार को टीकरी बॉर्डर पहुंचे और किसानों की मांगों के प्रति समर्थन व्यक्त किया। पंजाब सरकार के जेल विभाग से डीआईजी पद इस्तीफा देकर लखविंदर सिंह जाखड़ भी धरनास्थल में शामिल हुए।
पटियाला से आए जसबीर सिंह पटियाला ने टीकरी बॉर्डर पर पहुंच आंदोलन को समर्थन दिया। उन्होंने किसानों को कंबल बांटे। धरने की स्टेज कमेटी ने जसबीर को पटके पहनाकर स्वागत किया। हिसार के सुखबीर सिंह, किसान यूनियन (कीर्ति) पंजाब के हरजिंदर, दिल्ली के ज्ञान सिंह, पलवल की सुनीता चौधरी, जींद के बीबीपुर से पाला राम, एक्स सर्विसमैन लीग बहादुरगढ़ से धर्मबीर फौजी ने भी धरने पर बैठे किसानों की सभा के मंच से आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की। शुक्रवार से मौन व्रत पर बैठे झज्जर के किसान नेता प्रदीप धनखड़ व महावीर ने शनिवार को अपना मौन व्रत खोल दिया।
टीकरी बॉर्डर पर आयोजित सभा को कई किसान नेताओं ने संबोधित किया। सेक्टर-9 के साथ बाइपास पर शनिवार को किसानों की सभा नहीं हुई। बालोर चौक पर सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान लगातार किसान एकता जिंदाबाद, पंजाब-हरियाणा भाईचारा जिंदाबाद, बोले सो निहाल-सत श्री अकाल अकाल के जयकारे और काले कानून वापस लो आदि नारे लगते रहे। भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के जोगिन्दर सिंह नैन समेत तमाम वक्ताओं ने सरकार से तीनों कानूनों को रद्द करने और फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने के लिए के लिए कानून बनाने की मांग की। किसान नेताओं ने कहा कि तीनों कानून खत्म करने से कम उन्हें कुछ भी मंजूर नहीं है।