झज्जर के सासरौली गांव के अभय सिंह इन दिनों प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में आईआईटीएन बाबा के रूप में चर्चित हो गए हैं। पिछले पांच दिन से वह प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में शामिल होने गए हैं। करीब दो साल पहले वे अपना घर भी छोड़ चुके हैं। पिछले 6 माह से उनका परिवार से भी संपर्क नहीं हुआ है। अभय का कहना है कि वह अपने आपको संत और साधु नहीं मानते, बल्कि वैरागी मानते हैं। वह ज्ञान की खोज में निकले हैं। अब ज्ञान चाहे कहीं से भी मिले। वे ज्ञान लेकर मुक्ति और मोक्ष के रास्ते पर चल रहे हैं।
अभय सिंह के पिता कर्ण सिंह वकील हैं। वे झज्जर बार एसोसिएशन में प्रैक्टिस करते हैं। कर्ण सिंह ने बताया कि अभय की पढ़ाई झज्जर शहर के विभिन्न स्कूलों से हुई है। 12वीं पास करने के बाद अभय ने आईआईटी की कोचिंग ली और परीक्षा दी। इसमें अभय का काफी अच्छा रैंक आया। उन्होंने दिल्ली में दाखिला लेने के लिए कहा, लेकिन उसने आईआईटी मुंबई में एयरो स्पेस इंजीनियरिंग में दाखिला लिया।
इसके साथ ही अभय ने मास्टर ऑफ डिजाइनिंग और फोटोग्राफी का कोर्स भी किया है। अभय ने दिल्ली में 6 माह तक कंपनी में भी काम किया। इसके बाद वह कनाडा चले गए। वहां पर लगभग ढाई साल कंपनी में काम किया। कंपनी का 36 लाख रुपये सालाना का पैकेज था। कोरोना के दौरान अभय वापस भारत लौट आए। उसके बाद दिल्ली चले गए।
तंत्र-मंत्र भी सीखा और भक्ति भी
अभय सिंह का इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में अभय कहते दिखाई दे रहे हैं कि उनको जो पसंद था, वही किया। ऐसा ही दूसरों को करना चाहिए। बीटेक करते हुए भी वह साइकोलॉजी पढ़ते थे। अभय कहते हैं कि उन्होंने तंत्र-मंत्र भी सीखा है और भक्ति भी। आईआईटीएन बाबा के रूप में चर्चित अभय एक किताब भी लिख चुके हैं।
अभय से मिलना चाहता है परिवार
अभय के पिता कर्ण सिंह कहते हैं कि परिवार अभय से मिलना चाहता है। उन्होंने पहले भी और अब भी मिलने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। वे कहते हैं कि बेटे को घर वापस लाने का मन करता है, लेकिन वह नहीं मानेगा। क्योंकि वह वैराग्य के मार्ग पर चल रहा है।