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लंपी वायरस की रोकथाम के लिए दूसरे राज्यों व जिलों से पशुओं के आवागमन पर रोक, धारा 144 लागू

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फोटो : 09
लंपी चर्म रोग वायरस : 5600 पशुओं का टीकाकरण, धारा 144 लागू
लंपी वायरस: रोकथाम के लिए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए, धारा 144 लगाई
-बीमार पशुओं को तालाब में नहीं नहला सकेंगे
-डीसी ने गोभक्तों से भी सहयोग की अपील की
संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। जिले में पशुधन में लंपी वायरस बीमारी (एसएसडी) का अभी तक कोई केस नहीं मिला है लेकिन प्रशासन ने रोकथाम के लिए एहतियाती कदम उठाए हैं। 5600 पशुओं का टीकाकरण किया गया है। जिले में धारा 144 लागू कर दी गई है। दूसरे राज्यों व जिलों से पशुओं के आवागमन पर भी रोक लगा दी गई है। बीमार पशु को जोहड़, तालाब या बाहर दूसरे पशुओं के साथ ले जाने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
पशुपालन विभाग द्वारा लंपी की बीमारी की रोकथाम के लिए टीकाकरण, फॉगिंग, स्प्रे का कार्य शुरू कर दिया गया है। उपनिदेशक डॉ मनीष डबास के अनुसार जिले में 60 हजार गोवंश पशु पालकों के पास हैं और लगभग 17 हजार गोवंश गोशालाओं व निराश्रित है। डीसी शक्ति सिंह ने गोभक्तों से अपील की है कि वे टोली बनाकर गोवंश पालकों को बीमारी की रोकथाम के बारे में जागरूक करें और निराश्रित बीमार गोवंश को नजदीक के पशु चिकित्सालय तक पहुंचाएं। इससे बीमारी को फैलने से रोका जा सकेगा।
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लक्षण देखते ही दें सूचना : डीसी
डीसी ने लोगों से कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है। पशु में लक्षण प्रतीत होने पर तुरंत अपने नजदीक के पशु चिकित्सक से संपर्क करें। पशुपालन विभाग के पास बीमार पशु के ईलाज के लिए पशु चिकित्सक व दवाई उपलब्ध हैं।
इस नंबर पर दें जानकारी
आमजन की सुविधा के लिए पशु पालन विभाग के उपनिदेशक के नंबर जारी कर दिए गए हैं। अगर किसी भी व्यक्ति को किसी भी पशु में कोई लक्षण दिखाई दे तो वह उपनिदेशक डॉ मनीष डबास के मोबाइल नंबर पर 9416280013 पर संपर्क कर सकता है।
ये हैं बीमारी के लक्षण
पशुपालन विभाग के अनुसार इस बीमारी में पशु को तेज बुखार, नाक व मुंह से पानी गिरना, भूख न लगना, दूध में गिरावट आदि लक्षण दिखाई देते हैं। पशु के पूरे शरीर पर दर्दनाक चकते व गांठे हो जाती हैं जो बाद फूटकर घाव में परिवर्तित हो जाती हैं। लंपी संक्रामक बीमारी है जो मच्छर, मक्खी व चीचड़ के माध्यम से फैलती है। यह बीमारी पशुओं की लार, दूषित चारा व पानी से फैलता है।
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लक्षण मिलने पर ये करें
यदि किसी पशु में लक्षण नजर आएं तो उसे दूसरे स्वस्थ पशुओं से अलग बाड़े में रखें। पशु के इलाज के लिए नजदीक के पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्सक से संपर्क करें। पशुओं के बाड़े को साफ सुथरा रखें। पशु बाड़े में नियमित रूप से वायरस रोधी दवा का छिड़काव करें। नीम व गुगल की पत्तियों का धुआं भी करें।
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