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लोन दिलाने के नाम पर फैलाया ठगी का जाल

Thu, 02 Oct 2014 12:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर बहादुरगढ़
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शहर में फाइनेंस कंपनी चलाने के नाम पर एक गिरोह ने देश के कई राज्यों के दर्जनों लोगों से लाखों रुपये ठग लिए। लोगों को उनके साथ हुई ठगी का जब अहसास हुआ तो वे पता करते हुए बहादुरगढ़ तक पहुंचे, लेकिन उन्हें कथित फाइनेंस कंपनी का नगर में कोई आफिस ही नहीं मिला।
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इस पर इनमें से कुछ लोगों ने पुलिस को शिकायत देकर ठगों को पकड़कर इंसाफ दिलाने की गुहार लगाई है। ठगों के इस गिरोह ने जुलाई में फाइनेंस कंपनी के एक छोटे से इश्तिहार के माध्यम से मजबूर लोगों को अपने जाल में फंसाना शुरू किया।

इसके जरिये पहले लोन और फिर कमीशन आदि का लालच दिया गया। संपर्क के लिए दो मोबाइल फोन नंबर और वेबसाइट एड्रेस दिया गया। यूपी के जिला कासगंज के गांव नगला भूपाल के निवासी विजय सिंह ने इस कथित कंपनी के नंबर पर संपर्क किया तो कंपनी की ओर से विजय को एजेंट बनने को कहा गया। गिरोह ने एजेंट बनने के लिए विजय को आवेदन पत्र मेल कर दिया।
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विजय को एजेंट बनाने का स्वीकृति पत्र भी मेल से भेज दिया। अब सितंबर में विजय ने लोन की जरूरत वाले तीन लोगों छत्रपाल, वीरपाल व कुंवरपाल आदि के ऋण आवेदन-पत्र लेकर कथित कंपनी को भेज दिए। छत्रपाल ने तीन-तीन लाख रुपये और कुंवरपाल ने पांच लाख रुपये ऋण के लिए आवेदन किया।

कई बार कंपनी के खाते में जमा करवाए रुपये

गिरोह ने तीसरे दिन ही एजेंट विजय सिंह को ई-मेल से तीनों के ऋण मंजूरी-पत्र भेज दिए। साथ ही फाइल चार्ज के नाम पर हरेक आवेदक को 1540 रुपये भेजने को कहा। साथ ही ऋण राशि प्रति लाख पर 620 रुपये डिमांड ड्राफ्ट शुल्क मांगा गया। गिरोह द्वारा बताए गए हरजिंद्र सिंह के सेंट्रल बैंक के खाता नंबर में विजय ने 11440 रुपये जमा करवा दिए।

फिर विजय को भारत गुप्ता नाम के शख्स का हेल्पलाइन नंबर दिया गया। इस नंबर से भारत गुप्ता ने तीनों आवेदकों के हैसियत प्रमाण-पत्र मांग लिए और कहा कि 20 सितंबर तक लोन के चेक मिल जाएंगे। विजय और गिरोह के बीच सारी बातचीत मोबाइल फोन के जरिये होती थी। दोनों पक्षों की एक-दूसरे से आमने-सामने की मुलाकात कभी नहीं हुई थी। कासगंज के तहसीलदार से तीनों के हैसियत प्रमाण-पत्र बनवा विजय ने कल्पना फाइनेंस को मेल कर दिए। फिर कहा कि ये नहीं चलेंगे कलेक्टर से बनवाकर भेजो।

विजय ने इसमें ज्यादा वक्त लगने की मजबूरी बताई तो कथित भारत गुप्ता ने जल्द लोन के लिए तीनों आवेदकों के ऋण वापसी की शुरुआती दो-दो किश्तें अग्रिम भेजने को कहा। विजय ने 30 हजार रुपये सेंट्रल बैंक के उपरोक्त खाते में डाल दिए और तीनों आवेदकों के लोन के डीडी आने का इंतजार करता रहा। गिरोह फोन पर टालता रहा। कहा कि कोर्ट में एग्रीमेंट होगा और इससे पहले कर्ज का डेढ़ फीसदी देना होगा। विजय ने 25 सितंबर को 11 लाख रुपये का डेढ़ फीसदी 16500 रुपये फिर खाते में जमा करा दिया।

तब भारत गुप्ता ने आश्वासन दिया कि 26 सितंबर को वह डीडी लेकर कासगंज आएंगे और एग्रीमेंट साइन होने के बाद डीडी दे देंगे। उसी दिन 25 सितंबर की शाम को भारत ने विजय को फोन करके कहा कि ट्रेन में उनका आरक्षण नहीं हुआ, कार से आना पड़ेगा, 10 हजार रुपये भेज दो। जाल में फंस चुके विजय ने थोड़ी सी उम्मीद में ये 10 हजार रुपये भी खाते में डाल दिए।

अगले दिन 26 सितंबर को विजय ने फोन से पूछा तो भारत ने कहा कि वह मथुरा तक आ गया है, लेकिन विजय के पास कोई नहीं पहुंचा। उसके बाद से विजय लगातार फोन लगा रहा है, लेकिन कोई फोन ही नहीं उठा रहा।

पुलिस को लगाई न्याय की गुहार

हालांकि गिरोह के सभी नंबर अब भी चल रहे हैं। ढूंढ़ता-ढूंढ़ता विजय बुधवार को बहादुरगढ़ पहुंचा। बहादुरगढ़ के विजय नगर में फाइनेंस कंपनी का कोई आफिस नहीं मिला। ठगों के जाल में फंसकर विजय तीन लोगों के 70 हजार रुपये गंवा बैठा।

विजय ने बहादुरगढ़ थाने में शिकायत देकर ठगों को पकड़ने व न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि कथित फाइनेंस कंपनी चलाने वाले इस गिरोह ने इसी तरह से दर्जनों लोगों को शिकार बनाया होगा। इस कथित कंपनी की वेबसाइट भी इंटरनेट पर उपलब्ध है। भारत गुप्ता का हेल्पलाइन नंबर भी इस वेबसाइट पर लिखा है।
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अभी मेरे संज्ञान में यह मामला नहीं आया है। जिसे ही मुझे इस बारे में कोई शिकायत मिलती है तो उस पर कार्रवाई जरूर की जाएगी। - जयकिशन दहिया, एसएचओ, सिटी

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