शहीद लीलराम की पत्नी तारावती
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परिवार को बखूबी संभाला
शहीद लीलाराम की शहादत के तीन महीने बाद ही वीरांगना ने आईटीआई झज्जर में क्लर्क की नौकरी शुरू की और साथ ही अपने आठ वर्षीय बेटे राजेश और पांच वर्षीय बेटे राकेश का पालन पोषण किया। पति के निधन के 3 वर्ष बाद ही तत्कालीन सरकार की ओर से उन्हें गैस एजेंसी उनके पति शहीद लीलाराम के नाम से मातनहेल में मंजूर हुई। इसके बाद उन्होंने क्लर्क की नौकरी छोड़ दी और गैस एजेंसी के माध्यम से अपना जीवन यापन किया। उन्होंने बताया कि बड़ा बेटा राजेश गैस एजेंसी संभाल रहा है। छोटे बेटा राकेश लोक निर्माण विभाग में क्लर्क के पद पर कार्यरत है।