बहादुरगढ़। हर साल गर्मी के सीजन में आग लगने की घटनाएं होती हैं। ढाई साल में 1542 आग की घटना हो चुकी हैं। किसानों की फसल चलती है। फैक्टरियों में मशीन और माल जलता है। आमजन की करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ। इसके बावजूद अग्निशमन विभाग के संसाधनों को बेहतर बनाने पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। हालत ये है कि एक अधिकारी पर तीन जिलों की जिम्मेदारी है। घटना होने पर एक वाहन पर छह कर्मियों की जरूरत हाती है लेकिन केवल दो ही भेजे जाते हैं।
दमकल विभाग के पास न तो पूरा स्टाफ है और न ही अधिकारी और न ही आग बुझाने के लिए पर्याप्त गाड़ी। अग्निशमन विभाग के सेशन ऑफिसर पंकज कुमार के पास रोहतक, झज्जर और बहादुरगढ़ केंद्रों का जिम्मा है । एक ही अधिकारी तीन तीन केंद्र का काम कैसे संभाल सकता है। ढाई साल में 1542 आग की घटना हो चुकी हैं। हर साल हादसे होने के बाद फायर बिग्रेड महकमे में संसाधनों की कमी पर सवाल उठते हैं लेकिन इसके बाद भी संसाधन बढ़ाने पर किसी का ध्यान नहीं है। उद्यमी और किसान नेताओं में भी इसे लेकर नाराजगी है। दमकल विभाग पर अग्निकांड से निपटने के अलावा आपात स्थिति में लोगों की मदद करने का जिम्मा भी है।
दरअसल दमकल विभागकर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। दमकल विभाग के पास इस वक्त 40 कर्मचारी, छोटी-बड़ी 12 और 5 छोटी फाइटर बाइक हैँ। दमकल विभाग के अधिकारियों की मानें तो जब कहीं आग लगती है तो दमकल की एक गाड़ी पर छह कर्मचारी जाते हैं। इनमें एक ड्राइवर, एक इंचार्ज व चार फायर ऑपरेटर होते हैं। स्टाफ की कमी की वजह से ऑपरेटर दो या तीन भेजने पड़ रहे हैं। दिक्कत तब और ज्यादा बढ़ जाती है जब एक साथ कई जगह पर आगजनी की घटनाएं हो जाती हैं। गाड़ी पर स्टाफ कम होनेेके कारण घटना स्थल पर आग बुझाने में भी परेशानी व देरी होती है। बहादुरगढ़ शहर में तीन अलग-अलग स्थानों पर तीन दमकल स्टेशन हैं। इनमें एक एचएसआईआईडीसी सेक्टर-17, एमआइई पार्ट-ए और तीसरा शहर के बीच इंदिरा मार्केट में है। ्