झज्जर। राजकीय स्नातकोत्तर नेहरू महाविद्यालय ने राग पुरिया धनाश्री एवं राग यमन पर आधारित कुलगीत तैयार किया है। इसे दादरा ताल की छह मात्राओं में निबद्ध किया है तथा बीच में ताल कहरवा और दादरा का वेस्टर्न वर्जन का भी प्रयोग किया है।
महाविद्यालय ने अपना कुलगीत तैयार कर औपचारिक रूप से जारी कर दिया है। इसकी रचना जनसंचार विभागाध्यक्ष डॉ. अमित भारद्वाज ने की है। संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. तमसा के निर्देशन में संगीत विभाग के विद्यार्थियों ने इसे स्वरबद्ध किया है।
प्राचार्य डॉ. दलबीर सिंह और वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. सुरेन्द्र कुमार पूनिया ने इस गीत की रचना को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह कुलगीत भविष्य में महाविद्यालय के सभी औपचारिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में गाया जाएगा।
डॉ. तमसा ने बताया कि दो महीने की मेहनत के बाद कुलगीत स्वरबद्ध किया जा सका। सर्दी में देर शाम तक कॉलेज में रहकर कुलगीत पर निरंतर अभ्यास किया गया।
संगीत विभाग ने कंपोज किया गीत
संगीत विभाग के पूर्व विद्यार्थी अमित और मोहित तथा वर्तमान विद्यार्थियों तन्नू, मुस्कान, काव्यांजलि, रितु, सलोनी, शिल्पा, भव्य, कपिल, विवेक, राहुल, सचिन और तबला वादक अश्विनी के सामूहिक सहयोग से कुलगीत को सफलतापूर्वक कंपोज किया गया।
महाविद्यालय की स्थापना, आदर्श व सामाजिक भूमिका का चित्रण करेगा कुलगीत
डॉ. अमित ने बताया कि यह कुलगीत महाविद्यालय की स्थापना, उसके आदर्शों और उसकी सामाजिक भूमिका का भावपूर्ण चित्रण करता है। इसमें बताया है कि नेहरू कॉलेज आम जन, किसान, मजदूर और सैनिक के श्रम, त्याग और सहयोग से बना है। यहां ज्ञान का दीप जलाकर समाज को शिक्षा के माध्यम से प्रकाशमान किया है। गीत में महाविद्यालय को ज्ञान-साधना का पवित्र केंद्र बताया गया है जहां अनुशासन, अनुसंधान और परिश्रम के द्वारा विद्यार्थी उन्नति के शिखर तक पहुंचते हैं।