बादली। बेमौसमी बारिश के डर से ईंट-भट्ठा संचालक चिंतित हो गए हैं। एक मार्च से भट्ठा शुरू हुए हैं और बारिश का डर सताने लगा है। क्योंकि कच्ची ईंटों की पथाई हो रखी है। ऐसे में कच्ची ईंटों को बचाने में भट्ठा संचालक जुट गए हैं। इसके लिए तिरपाल का प्रयोग किया जा रहा है। भय है कि लाखों रुपये की कच्ची ईंट बरसात में खराब हो सकती है।
शनिवार को हल्की बूंदाबांदी हुई और ईंट-भट्ठा संचालकों के पसीने छूट गए हैं। जुलाई 2023 से पूरी तरह से काम बंद है और एक मार्च से एनजीटी के निर्देशों के तहत काम शुरू हुआ है। अब जब तक कच्ची ईंटों को पका नहीं दिया जाता, तब तक इनको खतरा बना हुआ है। क्षेत्र में करीब 250 ईंट-भट्ठों पर हजारों मजदूर ईंट पथाई का काम करते हैं।
वहीं कृषि अधिकारी कुलदीप धनखड़ ने बारिश का मिला जुला असर क्षेत्र में बताते हुए कहा कि यह गेहूं की फसल के लिए लाभदायक है। सरसों की खेती करने वाले किसानों को कटाई कार्य में तेजी लानी चाहिए।