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किक-बॉक्सिंग में छाई गोयला कलां की बेटी कुसुम, जीता सिल्वर

Mon, 26 Sep 2016 01:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बहादुरगढ़
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गोयला कलां की बेटी ने जीता सिलवर - फोटो : bureau
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रूस में चल रहे किक बाक्सिंग वर्ल्ड कप में दुनिया भर के खिलाड़ियाें ने हरियाणा की बेटी के मुक्कों का दम देखा। झज्जर जिले की निवासी कुमारी कुसुम ने वर्ल्ड क प में सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है। स्वदेश लौटने पर खेल प्रशंसकाें द्वारा उसका जोरदार अभिनंदन किया जाएगा।
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रूस में इन दिनाें (21 से 28 सितंबर तक) किक बॉक्सिंग वर्ल्ड कप चल रहा है। विश्व भर के किक-बॉक्सर इसमें भाग ले रहे हैं। जिले के गांव गोयला कलां निवासी कुमारी कुसुम ने 60 किलोग्राम भारवर्ग में देश का प्रतिनिधित्व किया। अपने लात-मुक्कों के दम पर कुसुम ने वर्ल्ड कप में हरियाणवी मिट्टी की चमक बिखेरी। वह शुरुआती चाराें मैचों में प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों पर पूरी तरह से हावी रही। शनिवार रात ईरान की खिलाड़ी फारिका को हराकर कुसुम ने फाइनल में प्रवेश किया।

फाइनल मैच रविवार की देर रात रूस की फोनिका वलादिस्लावा के साथ हुआ। इस निर्णायक मुकाबले को कुसुम के परिजनों, जिलावासियों और किक बॉक्सराें को बेसब्री से इंतजार था। कुसुम के परिजन तो उसकी जीत के लिए दिनभर भगवान से दुआएं करते रहे। रात करीब 11 बजे मुकाबला शुरू हुआ। फाइनल में भी कुसुम ने जोरदार खेल दिखाया। बेशक कुसुम गोल्ड मेडल जीतने से चूक गई, लेकिन सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन कर दिया।
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ऐसा पहली बार हुआ
कोच जसवंत के मुताबिक, किक बॉक्सिंग वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचने वाली कुसुम देश की पहली किक बॉक्सर है। इससे पहले पांच वर्ल्ड कप हो चुके हैं। कोई भी महिला किक बॉक्सर फाइनल तक नहीं पहुंच सकी थी। रूस में खेलने गई हरियाणा की एकमात्र खिलाड़ी कुसुम ने पहली बार में ही फाइनल में प्रवेश कर एक नई उपलब्धि हासिल की है। कुसुम की सफलता से इस खेल को राज्य में एक नई ऊर्जा मिलेगी।

शानदार है कुसुम
बेहद ही साधारण परिवार से संबंध रखने वाली कुसुम बेहद शानदार खिलाड़ी है। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय दुल्हेड़ा में फिलहाल 11वीं की छात्रा कुसुम ने 8वीं कक्षा से किक बॉक्सिंग खेलना शुरू किया था। कोच जसवंत सिंह के मार्गदर्शन में कुछ ही महीने के प्रशिक्षण के बाद कुसुम ने जिस भी प्रतियोगिता में भाग लिया, उसी में गजब का खेल दिखाया।

मंत्री धनखड़ ने बढ़ाए थे मदद के लिए हाथ
गांव में इलेक्ट्रीशियन का काम करने वाले कुसुम के पिता गुलाब सिंह अपनी बेटी को खेलने के लिए हमेशा प्रोत्साहित करते हैं। यही कारण है कि कुसुम लगभग हरेक मुकाबले में पदक जीतती है। पिता गुलाब सिंह भी कुसुम को बेटों से बढ़कर मानते हैं। कोच जसवंत सिंह कहते हैैं कि कुसुम जब भी खेलती है तो जीत के लिए ही खेलती है। आर्थिक तंगी के चलते कुसुम के वर्ल्ड क प खेलने पर संकट के बादल मंडरा गए थे, लेकिन कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़, गांव की पंचायत, कुछ समाजसेवी लोग कुसुम की मदद के लिए आगे आए।
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कुसुम की उपलब्धियां
-सितंबर-2016 : किक बॉक्सिंग वर्ल्ड कप डायमंड (रूस) में सिल्वर मेडल
-फरवरी-2016 : दिल्ली में हुई दिल्ली प्रो-किक बॉक्ंिसग में श्रेष्ठ फाइटर का खिताब जीता।
-अगस्त-2015 : महाराष्ट्र में हुई एशियन किक बाक्सिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीता।
-अक्तूबर 2014 : पुणे में हुई जूनियर नेशनल किक बॉक्ंिसग चैंपियनशिप में कांस्य पदक
-फरवरी-2016 : दिल्ली में हुई जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड
- फेडरेशन कप 2015-16 में गोल्ड
-मार्च 2015 : पुणे में हुई ला किक सीनियर नेशनल चैंपियनशिप-15 में रजत।
-सितंबर 2014 : दुल्हेड़ा में हुई पहली झज्जर जिला किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप में दूसरा स्थान
-जून 2015 को झज्जर जिला चैंपियनशिप में प्रथम
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