साल्हावास।क्षेत्र के गांव खानपुर कला में गोगाजी के मंदिर में चल रहे दो दिवसीय मेले का समापन मंगलवार हो गया। इस मौके पर दंगल में पहलवानों ने कुश्ती में अपना दम खम दिखाया। एक लाख रुपये की पहली कुश्ती कैप्टन जोरा सिंह अखाड़ा गोधडी के पहलवान के आशीष टिकान व विक्रम कोट के मध्य हुई यह कुश्ती खड़े मुकाबले में बराबर रही। 51 हजार रुपये की दूसरी कुश्ती कृष्ण अखाड़ा खानपुर खुर्द के पहलवान रामधन झामरी व मस्तु अखाड़ा खुड्डन के पहलवान दीपक के बीच हुई, जिसमें रामधन झामरी विजय हुए। 31 हजार की तीसरी कुश्ती खानपुर के दीपक मड्डू अखाड़ा बहू व नवदीप बुपनिया के बीच हुई। इसमें दीपक खानपुर विजयी रहे। 21 हजार रुपये की चौथी कुश्ती कृष्ण अखाड़ा खानपुर खुर्द चांद पहलवान व विशाल सोनीपत के बीच हुई, जिसमें चांद खानपुर विजयी रहे। इसके अलावा भी अनेक कुश्ती करवाई गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सीएलपी पावर प्लांट के राजीव राव, मनवर भंडारी, वनिता मौजूद रहे। अतिथियों व कमेटी के पदाधिकारी ने दंगल में पहलवानों के हाथ मिलाकर कुश्ती शुरू करवाई।
दूध दही चूरमा का लगाया भोग
खानपुर कला गांव के गोगाजी मंदिर में जन्माष्टमी और गोगा नवमी के अवसर पर दो दिन तक साल में एक बार मेला लगता है। नवमी को श्रद्धालुओं ने दूध, दही, चूरमा का भोग लगाया। मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु गोगाजी व गोरखनाथ के दर्शन करने के लिए मंदिर में पहुंचे और माता टेक मन्नत मांगी।
खानपुर कलां की मेडी की मान्यता
खानपुर कलां मेड़ी के बारे में ग्रामीणों का कहना है कि खानपुर खुर्द गांव निवासी केसरिया किसान अकाल पड़ने पर गांव छोड़कर कहीं अन्य स्थान पर जा रहा था। उस दौरान झासवां गांव के पास तेज बारिश होने लगी। वर्षा के पानी के कारण जमीन में पडे़ कटाव से बह रहे पानी के कारण वहां से खनखनाहट की आवाज आ रही थी। उस समय आकाशवाणी हुई कि इस खजाने को ले जाओ और मेरी मेड़ी पक्की बनवा कर अपने गांव चले जाओ। केसरिया को खजाने से भरा टोकना दिखाई दिया। केसरिया भक्त ने खजाने का टोकना बाहर निकाला और अपने गांव वापिस आ गया। वह मेडी बनवाने की बात भूल गया और गांव में कुआं बनवाने लगा तो कुएं की कोठी फट गई और पानी भी खारा निकला। इसी दौरान दोबारा फिर भविष्यवाणी हुई कि केसरिया तुम मेरी मेडी बनवाना भूल गए और कुआं बनवाने लगे। केसरिया भक्त ने बाबा जाहरवीर से माफी मांगी उसके बाद खानपुर खुर्द में जटाली जोहड़ी के पास पत्थर डलवाकर मेडी बनवाने की योजना बनाई, लेकिन फिर भविष्यवाणी हुई कि यहां तो नजदीक शमशान घाट है। यहां मेरी मेडी मत बनवाओ। मेरी मेडी खानपुर कलां की बणी में उस स्थान पर बनवाओ, जहां घोड़े के पैरों के निशान मिले। जब केसरिया भक्त खानपुर कलां की बणी में आया तो उसे एक स्थान पर घोड़े के पैरों के निशान मिल गए और उन्होंने वही पर गोगामेड़ी का निर्माण करवा दिया। हालांकि समय अनुसार लोगों की आस्था बाबा जाहरवीर में बढ़ती गई और गांव खानपुर कलां के लोगों ने मंदिर कमेटी का निर्माण कर आसपास के सभी लोगों व गांव के दानवीर लोगों की मदद से विशाल गोगामेड़ी व गोरखनाथ मंदिर का निर्माण करवाया गया।