झज्जर। हर काम में सबका साथ देने वाले और गांव के लिए प्रेरणा बने कर्ण सिंह वीरवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। सुबह 7 बजे से ही पूरा गांव कर्ण सिंह अमर रहे और भारत मां के जयकारों से गूंजता रहा। गांव के बुजुर्ग अंतिम संस्कार की तैयारी में तागे वाला तालाब पर पहुंच गए थे। युवक मोटरसाइकिल, अन्य गाड़ियों पर तिरंगा सजाने में लगे थे, ताकि शहीद को सम्मान के साथ गांव लाया जा सके।
सुबह लगभग 9 बजे युवकों का काफिला गांव से दिल्ली-झज्जर बॉर्डर पर पहुंचा। कुछ युवा बादली रोड बाईपास पर ही रुक गए। बॉर्डर से काफिले में शहीद के शव को एंबुलेंस से लाया गया। सबसे पहले बादली रोड बाईपास पर लोगों ने पुष्प वर्षा कर शहीद काे नमन किया।
यहां पूर्व मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ और बादली से विधायक कुलदीप वत्स ने शहीद को श्रद्धांजलि दी। शहीद के भाई अर्जुन को सांत्वना दी। यहां से शव को काफिले में ही गांव ले जाया गया। मुख्य बस अड्डे पर शव पहुंचते ही कर्ण अमर रहे, भारत मां के जयकारे लगने शुरू हो गए।
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बहन बोली- मेरा डीसी भाई आ गया
जैसे ही शहीद का शव घर के बाहर पहुंचा तो मां सावित्री और बहनें आ गई। मां एंबुलेंस को देखकर बेसुध हो गई। परिजन उसे संभालने में लग गए। वहीं बहन भी अपने आंसू रोक नहीं सकी। बोली मेरा डीसी भाई आ गया है।
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शहीदी के बेटा और बेटी ने दी श्रद्धांजलि
तागे वाला तालाब पर शहीद की 3 साल की बेटी परी और 8 माह के बेटे हन्नी को भी लाया गया। परिजनों ने दोनों से श्रद्धांजलि और सलामी भी दिलवाई। मुखाग्नि से पहले जब शहीद को सलामी दी गई तो कर्ण के भाई अर्जुन ने भतीजे का हाथ पकड़कर उससे सलामी दी। बेटे ने भी लगभग एक मिनट तक अपना हाथ माथे से नहीं हटाया।
उपायुक्त ने दी श्रद्धांजलि
उपायुक्त शक्ति सिंह ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। तटरक्षक बल की टीम शहीद कर्ण सिंह के पार्थिव शरीर को जैसे ही डावला गांव लेकर पंहुची तो हर कोई अपने लाडले सपूत के अंतिम दर्शनों के लिए उमड पड़ा। डीसी शक्ति सिंह ने कहा कि कर्ण सिंह एक साहसी गोताखोर थे, जिन्होंने अपने प्राणों की परवाह न करते हुए पोरबंदर तट के पास रेस्क्यू मिशन में हिस्सा लिया। हम कर्ण सिंह के माता पिता को प्रणाम करते हैं। जिन्होंने ऐसे वीर जवान को जन्म दिया।
निर्भीक और हंसमुख थे कर्ण सिंह
ग्रामीणों ने बताया कि कर्ण सिंह निर्भीक और हंसमुख इंसान थे। हर मुश्किल कार्य को करने के लिए आतुर रहते थे। तैराकी उनका बचपन से ही शौक था। कर्ण सिंह अपने पीछे माता सुमित्रा देवी, पत्नी आरती, एक बेटा हनी और एक बेटी परी छोड़ गए हैं।
कर्ण के बलिदान को सदैव याद किया जाएगा : धनखड़
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव ओमप्रकाश धनखड़ ने डावला के लाडले शहीद कर्ण सिंह को नमन करते हुए कहा कि मां भारती की सेवा करते हुए अपने जीवन का बलिदान दिया है। शहीद कर्ण सिंह की शहादत को सदैव याद किया जाएगा। धनखड़ ने शहीद कर्ण सिंह के घर पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधाया। अंतिम यात्रा में भागीदार बनते हुए उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर नमन किया।
वीरों की वजह से देश की सीमाएं सुरक्षित : कुलदीप
बादली से विधायक कुलदीप वत्स ने कहा कि कर्ण सिंह जैसे वीरों की शहादत से देश की सीमाएं सुरक्षित हैं। राष्ट्रीय आपदा के समय हम बचाव के लिए सेना की ओर देखते हैं। सेना के जवान अपना जीवन का बलिदान देकर देश की सीमाओं की हिफाजत करते हैं। प्राकृतिक आपदा के समय देशवासियों की रक्षा करने को तत्पर रहते हैं।
तागे वाला तालाब के प्याऊ पर बनाई जाएगी समाधि
गांव की प्याऊ के पास कर्ण सिंह के नाम की समाधि बनाने की तैयारियां भी चल रही है। यही पर पहले भी बीएसएफ के जवान विनोद कुमार की भी समाधि बनाई गई है।
यह लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर जिला परिषद चेयरमैन और भाजपा से उम्मीदवार कप्तान बिरधाना, डीपी कौशिक, चैनसुख गुरहिया, डीपीआईआरओ सतीश कुमार, डीआरओ प्रमोद चहल, बीडीपीओ युद्धवीर सिंह मौजूद रहे।