बहादुरगढ़। 300 साल पुराने मुरली मनोहर मंदिर में जन्माष्टमी पर्व पर वृंदावन से आई पोशाक से कान्हा का शृंगार किया जाएगा। पीतांबरी रंग की यह पोशाक वृंदावन मंदिर कमेटी की ओर से भेजी जाएगी। पोशाक पर कृष्ण की लीलाओं का वर्णन होगा। मंदिर को आकर्षक लाइटों और मंदिर मार्ग को झालरों से सजाया गया है।
वहीं जन्माष्टमी पूर्व संध्या पर 3 सितंबर को मंदिर में सुबह 10 बजे 101 लीटर दूध से कान्हा को स्नान कराया जाएगा। मंदिर के पुजारी योगेश शास्त्री ने बताया कि मंदिर का निर्माण बहादुरगढ़ के बनियों द्वारा कराया गया था। 4 सितंबर को मंदिर में जन्माष्टमी का पर्व हर्षोंल्लास के साथ मनाया जाएगा। मंदिर को एलईडी और रंग-बिरंगी लाइटों के साथ-साथ सुभाष चौक से गांधी चौक तक झालरों से सजाया गया है। मंदिर के मुख्य द्वार को फूलों से बनी तोरण से सजाया गया है।
जन्माष्टमी की शाम भजन कीर्तन के साथ रासलीला का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में कलाकार हेमचंद्र भारद्वाज, हरीश व कृष्ण शर्मा अपनी मधुर आवाज में गायन करेंगे। मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु कान्हा के दर्शन करने पहुंचेंगे। कान्हा को 56 पकवान का भोग लगाया जाएगा। शाम 7 बजे भंडारा शुरू होगा।
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यह है मंदिर का इतिहास
मंदिर के पुजारी योगेश शास्त्री ने मंदिर के इतिहास के बारे में बताया कि बेरी के एक सेठ जो कान्हा की मूर्ति को लेकर जयपुर जा रहे थे। रात्रि के समय सेठ ने मूर्ति की स्थापना यहां स्थित तालाब के किनारे कर दी, जब सुबह वे मूर्ति को दोबारा जयपुर ले जाने के लिए रवाना होने लगे तो मूर्ति अपने स्थान से हिल नहीं सकी। बकौल, मंदिर पुजारी शास्त्री के अनुसार तत्कालीन संत शांतिनाथ ने मंदिर पुजारियों को बताया था कि कान्हा जी यहीं स्थापित होना चाहते हैं। तभी मंदिर में मूर्ति स्थापित हुई और तभी से इस मंदिर में कान्हा की पूजा अर्चना व जन्माष्टमी महोत्सव मनाया जाता है।
-फोटो 94 : शहर के मेन बाजार में स्थित 300 साल पुराना मुरली मनोहर मंदिर। संवाद