फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jhajjar-Bahadurgarh News: मुनीमपुर हादसे की न्यायिक जांच शुरू, बचाव कार्य में लापरवाही के आरोप

Sat, 25 Jul 2026 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
विज्ञापन
फोटो नंबर 72: जांच के दौरान विभिन्न विभागों और ग्रामीणों के बयान दर्ज करते एसडीएम विशाल कुमार।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

बादली। मुनीमपुर गांव में 19 जुलाई की रात हुए हादसे की न्यायिक जांच शुक्रवार को शुरू हुई। बादली के उप जिलाधिकारी विशाल कुमार जांच अधिकारी हैं। जांच के पहले दिन फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस, चिकित्सा और पुलिस विभाग के अधिकारियों के बयान दर्ज हुए।
ग्रामीणों की कमेटी सुबह करीब 11 बजे उप जिलाधिकारी के समक्ष पहुंची। करीब पांच घंटे तक हादसे से जुड़े सभी पक्षों से पूछताछ चली। ग्रामीणों ने राहत एवं बचाव कार्य में लापरवाही के आरोप लगाए और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठे। अचल रेजिडेंट मेडिकल अधिकारी ने बताया कि नरेंद्र को समय पर अस्पताल पहुंचाया जाता तो जान बच सकती थी। ग्रामीणों ने कहा कि घटनास्थल पर चिकित्सकों की टीम नहीं पहुंची। बादली सीनियर मेडिकल अधिकारी शशि सहित अन्य चिकित्सकों ने भी बयान दिए। पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए। झज्जर सदर थाना प्रभारी परमजीत ने भी इस मामले में बयान दर्ज करवाए।
विज्ञापन

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि दुलीना पुलिस चौकी की टीम देरी से पहुंची। फायर विभाग पर भी सवाल उठे क्योंकि बचाव उपकरण वाली गाड़ी मौके पर नहीं थी। सहायक अग्निशमन अधिकारी कमलदीप ने बताया कि एक गाड़ी जींद रैली में थी। रिलायंस की गाड़ी में बीए किट थी, पर कर्मचारियों ने डर से इस्तेमाल नहीं किया।
जांच में एंबुलेंस व्यवस्था को लेकर भी सवाल सामने आए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चार घायलों के लिए केवल तीन एंबुलेंस भेजी गईं। एक चालक को ऑक्सीजन उपकरण का सही इस्तेमाल करना नहीं आता था, जिससे घायल मोनू को बिना ऑक्सीजन के मास्क लगा दिया गया। घायल रामू को एंबुलेंस न मिलने पर पुलिस की गाड़ी से अस्पताल ले जाना पड़ा।
विज्ञापन

इंसेट


ऐसे चली मुनीमपुर हादसे की जांच
11बजे — ग्रामीणों की कमेटी एसडीएम कार्यालय पहुंची।
पहला चरण — फायर ब्रिगेड विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए।
दूसरा चरण — एंबुलेंस सेवा से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ हुई।
तीसरा चरण — चिकित्सा विभाग के अधिकारियों और चिकित्सकों ने अपने बयान दर्ज करवाए।
अंतिम चरण — पुलिस विभाग के अधिकारियों से हादसे के दौरान की गई कार्रवाई और मौके पर पहुंचने को लेकर जानकारी ली गई।

इंसेट
क्या था हादसा?
मुनीमपुर गांव में 19 जुलाई की रात कुएं में गिरे बछड़े को बचाने के प्रयास में चार लोग कुएं में उतर गए थे। हादसे में चारों की मौत हो गई थी। घटना के बाद ग्रामीणों ने राहत एवं बचाव कार्य में अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए लापरवाही के आरोप लगाए थे। 20 जुलाई को हुई पंचायत में जिला उपायुक्त वर्षा खंगवाल ने मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए थे। अब एसडीएम विशाल कुमार की जांच में संबंधित विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्रामीणों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें