झज्जर। बेरी - झज्जर रोड पर गांव वजीरपुर की कृषि भूमि पर लगाया गया जीया वाला हैंडपंप करीब 35 साल से 3 गांव के लोगों की प्यास बुझा रहा है। क्षेत्र में जिसे श्रीराम उर्फ जीया वाला हैंडपंप कहकर पुकारा जाता है। तीन गांव के हजारों लोगों के गले को एक नल का तर करने का काम कर रहा है। गर्मी के दिनों में तो अलसुबह से ही लोग साइकिल, मोटरसाइकिल, पैदल व अन्य वाहन लेकर यहां पर कैंपर, मटके, 20 लीटर के केन व अन्य बर्तन लेकर पहुंच जाते हैं। गर्मी के दिनों में पानी लेने वालों की लंबी लाइन हैंडपंप पर लगती है।
क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया कि पेयजल को लेकर काफी परेशानी का सामना लोगों को करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि घर में पशुओं को पानी पिलाने के लिए, कपडे़ धाेने व साफ- सफाई के लिए 500 प्रति टैंकर पानी का मंगवाया जा रहा है क्योंकि गर्मी के दिनों में एक टैंकर से काम नहीं चलता। ग्रामीणों ने बताया कि सर्दी के दिनों में तो पानी की काफी कम खपत होती है। एक टैंकर से ही कई दिनों तक काम चल जाता है, लेकिन गर्मी के दिनों में पेयजल नहाने कपड़े धोने अन्य काम करने के लिए पानी की जरूरत पड़ती है। उन्होंने बताया कि सप्लाई का पानी भी कुछ देर तक ही आता है। जिसके चलते ग्रामीणों को पेयजल समस्या से कई वर्षों से जूझना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि श्रीराम उर्फ जीया ने 35 साल पहले अपनी जमीन पर सिचांई के लिए ट्यूबवेल लगाया था। ट्यूबवेल लगाने पर इसमें मीठा पानी निकला तो लोगों ने मीठा पानी अपने घर ले जाना शुरू कर दिया। उसके बाद यहां पर हैंपंप लगा दिया। उस समय से जीया वाले हैंडपंप पर से पानी लेने के लिए सैकड़ों की संख्या में सुबह शाम व दोपहर को कतार लगनी शुरू हो गई थी। श्रीराम उर्फ सीया के लड़के सूरजभान ने बताया कि उनके पिताजी ने 35 वर्ष पहले खेतों में ट्यूबवेल लगवाया था, लेकिन ग्रामीणों को पानी भरते देख उन्होंने इसे हैंडपंप में तब्दील कर दिया। जिससे लोगों को पानी भरने में आसानी हो सके। उन्होंने बताया कि हैंडपंप कभी खराब भी हो जाता है तो वे अपने खर्चें पर उसे दुरुस्त करवाने का काम करते हैं, ताकि लोगों को पेयजल उपलब्ध हो सके।
लोगों की प्रतिक्रिया :
हैंडपंप गर्मी के दिनों में लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है क्योंकि पेयजल के लिए लोगों को काफी भटकना पड़ता है। 35 साल सही हैंडपंप लोगों की प्यास बुझाने का काम कर रहा है।
दीपक, बाघपुर।
पेयजल की सप्लाई हालांकि की तीनों गांव में हैं लेकिन पेयजल की सफाई कुछ समय तक की आती है जिसके चलते रोजमर्रा के काम नही हो पाते हैं। और पेयजल की सप्लाई का पानी पीने योग्य भी नहीं है।
रोहित, बेरी।
करीब 35 साल से वजीरपुर, भागलपुरी, बेरी के लोग जिया वाला नलके से पानी भर रहे हैं इसके अलावा आने जाने वाले वाहन चालक भी पानी ले जाते हैं।
सुमित, वजीरपुर।
तीनों गांवों के अलावा अन्य गांव में भी पेयजल की समस्या गर्मी के दिनों में ज्यादा बढ़ जाती है लेकिन पीने के लिए पानी जीया के नलके से पानी भरते हैं। पानी बहुत ही मीठा व ठंडा हैं।
- अनिल कुमार, भागलपुरी।