झज्जर। पानी को रिसाइकिल कर बार-बार प्रयोग करने और एक-एक बूंद सहेजने के लिए खानपुर खुर्द स्थित झज्जर पावर लिमिटेड (जेपीएल) को राष्ट्रीय जल पुरस्कार मिलेगा। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की तरफ से राष्ट्रीय जल पुरस्कारों की सर्वश्रेष्ठ उद्योग की श्रेणी में देश में तीसरा स्थान हासिल करने वाले इस संस्थान को मंगलवार को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन के प्लेनरी हॉल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अवाॅर्ड देकर सम्मानित करेंगी।
झज्जर पावर लिमिटेड के एचआर हेड राजीव राव ने बताया कि जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए संस्थान में बार-बार रिसाइकिल कर जल संसाधन का उपयोग किया गया। इससे प्लांट में पानी की खपत महज 1.93 क्यूबिक मीटर प्रति मेगावाट प्रति घंटे रह गई जो केंद्र सरकार के पानी की खपत के नियम 3.5 क्यूबिक मीटर प्रति मेगावाट प्रति घंटे से काफी कम है। इसके लिए सबसे पहले जीरो लिक्विड डिस्चार्ज के तहत प्लांट के घरेलू गंदे पानी के लिए एसटीपी और प्लांट के गंदे पानी के लिए ईटीपी लगाए गए, जहां पर पानी का ट्रीटमेंट किया गया। पानी को ट्रीट कर उसका दोबारा प्रयोग वातावरण में फैली धूल कणों, राख, कोल यार्ड और हाॅर्टिकल्चर में किया गया।
इससे काफी पानी की बचत हुई। प्लांट की तरफ से ट्रीट किए गए पानी की भी टेस्टिंग की जाती है और उसे सत्यापित करने के लिए बाकायदा सरकार को भेजा जाता है। इसके अलावा प्लांट के कूलिंग सिस्टम में भी पानी का रिसाइकिल किया जाता है। एक ही पानी को बार-बार प्रयोग किया जाता है, जिससे अलग से साफ पानी की जरूरत नहीं पड़ती।
इसी तरह प्लांट में पानी की माॅनिटरिंग भी की जाती है ताकि कितना पानी प्रयोग हो रहा है या उसकी खपत हो रही है, उस पर नजर रखी जा सके। इसके लिए प्लांट में वाटर मीटर लगाए गए हैं। प्लांट में किसी भी तरह की पानी लीकेज की नियमित मॉनिटरिंग की जाती है ताकि पानी की बर्बादी न हो सके। प्लांट में कई रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं, जहां पर बारिश का पानी एकत्रित कर उसका प्रयोग किया जाता है।
पानी बचाने के लिए टीम बनाती है प्लान
प्लांट के एचआर हेड राव ने बताया कि प्लांट की तरफ से पानी बचाने को लेकर एक पूरी टीम का गठन किया हुआ है, जो समय-समय पर पानी कैसे बचाया जाए, उसके लिए प्लान तैयार करती है।
17jjrp16- झज्जर पॉवर लिमिटेड में लगाया गया एसटीपी, जहां पानी का ट्रीटमेंट किया जाता है। स्रोत-प