साल्हावास पंचायत समिति के वार्ड नंबर 10 में पड़ने वाले निवादा गांव के लोगों ने चुनाव का बहिष्कार किया। 814 वोट वाले गांव से सिर्फ एक बुजुर्ग न ही मतदान किया। दरसल इस वार्ड में दो गांव निवादा और मुंडाहेड़ा पड़ते हैं। पिछली पांच बार से मुंडाहेड़ा गांव का ही पंचायत समिति सदस्य चुना जा रहा था। इस बार निवादा वालों ने अपने प्रत्याशी के पक्ष में समर्थन मांगा, मुंडाहेड़ा वालों ने कोई जवाब ही नहीं दिया। जिससे नाराज निवादा वालों ने चुनाव का बायकॉट कर दिया।
निवादा व मुडाहेड़ा गांव पंचायत समिति के वार्ड नंबर दस में पड़ते हैं। दो योजना पहले तक कोहंद्रावाली गांव भी इस पंचायत समिति में पड़ता था, लेकिन यह गांव केवल निवादा व मुुंडाहेड़ा गांव बच गए थे। निवादा गांव में 814 वोट हैं। वहीं, करीब 3700 मतों वाले मुंडाहेड़ा गांव में मतदान सामान्य रूप से हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है गांव के लोगों ने नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले मुंडाहेड़ा गांव के लोगों से कहा था कि इस बार वे निवादा गांव को समर्थन दें ताकि उनके गांव के प्रत्याशी को भी मौका मिल सके। लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला और इस गांव के चार उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल करा दिया।
उसके बाद निवादा गांव से किसी भी उम्मीदवार ने नामांकन नहीं किया। रविवार की सुबह ग्रामीणों ने चुनाव का बहिष्कार कर दिया। लोगों ने जिला परिषद के 13 नंबर वार्ड के पार्षद पद व पंचायत समिति के 10 नंबर वार्ड के चुनाव के लिए मतदान ही नहीं किया। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि पंचायत समिति अलग करने के लिए भी प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की गई थी, लेकिन वह भी अलग नहीं हुई।
प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे गांव
चुनाव के बहिष्कार की सूचना मिलतेे ही साल्हावास के खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी उमेद सिंह, हलका पटवारी सतेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को मतदान के लिए अपील की लेकिन उनकी हर बात को ग्रामीणों ने अनसुना कर दिया।
धूप सिंह ने किया मतदान
निवादा गांव के धूप सिंह ने मात्र एक वोट डाला है। उनका कहना है कि करीब 15 साल पहले उन्होंने सरपंच पद के लिए चुनाव लड़ा था। उस समय उनके परिवार केे तीन लोगों ने ही उनके पक्ष में मतदान किया था। इस वजह से उन्होंने मतदान किया है। मताधिकार को प्रयोग करना उनका अधिकार है।
सभी प्रकार की व्यवस्थाएं देना प्रशासन का काम था, मतदान करना न करना दोनों गांवों का आपसी मामला था। अगर ग्रामीणों ने कोई ज्ञापन दिया होगा तो वह सरकार को भेज दिया जाएगा।
- शक्ति सिंह, उपायुक्त, झज्जर।