इसे हम विभागीय लापरवाही कहें या फिर इत्तफाक कुछ भी हो, लेकिन इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ेगा। बता दें कि शनिवार को मातनहेल के पास से गुजरने वाली जेएनएल नहर के टूटने के कारण करीब 350 एकड़ फसल जलमगभन हो गई।
जानकारी के अनुसार कुछ दिनों पहले ही विभाग द्वारा नहर की सफाई करवाई गई थी और करीब चार दिनों पहले ही पानी छोड़ा गया था। किसानों का मानना है कि सफाई की वजह से ही पुलिया नंबर 294 के पास नहर की पटरियों में कुछ दरारें आ गई थी। जिसके कारण धीरे-धीरे नहर में कटाव शुरू हो गया और पानी के दबाव के कारण पटरी टूट गई।
किसानों ने कहा कि नहर टूटने का वाकया करीब तीन और चार बजे के बीच का हो सकता है। नहर में पानी का दबाव इतना ज्यादा था कि कुछ ही क्षणों में मातनहेल की करीब 350 एकड़ फसल जलमग्न हो गई। सूचना मिलते ही नहर को मेन हैड से बंद कर दिया गया। विभागीय अधिकारियों का कहना था कि पीछे से पानी के बिल्कुल बंद होने के बाद ही इसे ठीक कर पाना संभव है। पानी की चपेट में आई फसल मालिक किसानों ने कहा कि कभी तो मौसम की मार और कभी इस प्रकार की आपदा आने के कारण खेती से अब हमारा घर चलाना मुश्किल हो रहा है।