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शहर भर में एनएचएम कर्मियों का प्रदर्शन, जाम से लोग परेशान

Sat, 05 Nov 2016 12:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर
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हड़ताल - फोटो : buraeau
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एनएचएम कर्मियों के धरने के 11वें दिन सर्व कर्मचारी संघ सहित विभिन्न ट्रेड यूनियनों के पदाधिकारियों ने धरनारत कर्मियों का समर्थन करते हुए सरकार के खिलाफ आरपार की लड़ाई का बिगुल फूंका। सुबह करीब 10 बजे विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी धरनास्थल श्रीराम पार्क में पहुंचे और आंदोलन को लेकर एनएचएम कर्मियों के साथ रणनीति बनाई। बाद में एनएचएम कर्मियों के साथ मिलकर शहर भर में प्रदर्शन किया और सरकार विरोधी जमकर नारेबाजी की। सैकड़ों की संख्या में कर्मचारियों ने शहर के विभिन्न चौक-चौराहों से गुजरते हुए लघु सचिवालय परिसर पहुंचे और अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सीटीएम को सौंपा। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं कर्मचारियों के प्रदर्शन को लेकर शहर के विभिन्न स्थानों पर जाम की स्थिति बन गई। प्रदर्शन के चलते वाहन चालकों को परेशानी हुई। इसके चलते ट्रैफिक पुलिस के जवानों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
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सरकार हड़ताल खत्म करने तो कर्मचारी मांगें पूरी करने पर अडे़
एनएचएम एसोसिएशन के जिला प्रधान सुरेंद्र ने बताया कि सरकार हड़ताल को खत्म करने को लेकर अड़ी हुई है, जबकि कर्मचारी मांगें पूरी करने की मांग को लेकर अडिग हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की हठधर्मिता के चलते कर्मचारी परेशान हैं, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगें पूरी नहीं करती, हड़ताल जारी रहेगी, चाहे सारे कर्मचारी ही बर्खास्त क्यों न हो जाए। उन्होंने बताया कि 13 नवंबर को करनाल में होने वाली कर्मचारी रैली में भी एनएचएम कर्मी बढ़-चढ़कर भाग लेंगे।
सरकार की नीतियां कर्मचारी विरोधी
 सर्व कर्मचारी संघ के प्रदेश महासचिव राजेंद्र जुलाना, कर्मचारी महासंघ के प्रांतीय महासचिव विरेंद्र सिंह धनखड़ सहित अन्य कर्मचारी नेताओं ने अपने अलग-अलग संबोधन में कहा कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से अपने आंदोलन को आगे चला रहे एनएचएम कर्मचारियों को बर्खास्त किया जाना अन्याय है। इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कर्मचारी नेताओं ने चेताया कि एनएचएम कर्मचारियों की मांगें जायज हैं, जिसे सरकार को हर हाल में पूरा करना चाहिए। उन्होंने बर्खास्त किए गए कर्मचारियों को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि यदि सरकार ने इनकी मांग स्वीकार नहीं की और बर्खास्त किए गए कर्मचारियों को वापस नहीं लिया तो फिर उनका संगठन सरकार के साथ आरपार की लड़ाई लड़ने को मजबूर होगा।
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