गुभाना गांव में कुष्ठ रोगी मिलने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। इस ग्रामीण के कुष्ठ पीड़ित होने की पुष्टि पीजीआई रोहतक में हुई है। हालांकि रोगी प्राथमिक स्तर पर है और उसका इलाज संभव है, लेकिन इस रोग के गांव में मिलने से स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है। शनिवार को स्वास्थ्य कर्मियों ने ग्रामीणों को इस रोग के बारे में जागरूक किया और कुष्ठ रोगी से भी बातचीत कर उचित परामर्श दिया।
शनिवार को एसएमओ संगीता खुराना के निर्देश पर एमपीएचडब्ल्यू कर्मी दीवान के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग के 40 कर्मचारी गुभाना गांव पहुंचे। स्वास्थ्य कर्मियों ने गांव में कुष्ठ रोग के प्रति ग्रामीणों को जागरूक किया। उन्होंने रोग के फैलने के कारणों की भी गंभीरता से जांच करते हुए गांव में सर्वे भी किया। दीवान ने बताया कि सर्वे की रिपोर्ट प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग और हरियाणा सरकार को भेजी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की टीम में एएनएम मंजू देवी और एसटीएम दीपक कुमार सहित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सभी कर्मचारी और आशा वर्कर्स भी मौजूद रहीं।
ये हैं रोग के लक्षण
स्वास्थ्य विभाग की ओर से दीवान ने ग्रामीणों को बताया कि इस रोग की शुरुआत में व्यक्ति के शरीर पर लाल, भूरे और तांबे रंग के निशान पड़ जाते हैं, जोकि दाग होते हैं। इन पर ठंडे, गर्म और सुई चुभाने से कुछ भी महसूस नहीं होता है। निशानों के ऊपर से बाल भी झड़ जाते हैं। इसके अतिरिक्त हाथों, पैरों और आंखों में कमजोरी भी आ जाती है।
संभव है इलाज
स्वास्थ्यकर्मियों ने ग्रामीणों को बताया कि कुष्ठ रोग के लक्षण मिलने पर रोगी समय पर इलाज करा ले तो रोग से होने वाली अंगहीनता से बचा जा सकता है। सभी सरकारी अस्पतालों में इसका इलाज भी मुफ्त किया जाता है। इसका इलाज एमडीटी दवा द्वारा संभव है। एक पत्ते में ही 28 दिन की दवा होती है। पांच से अधिक धब्बे होने पर 12 माह तक इलाज चलता है। इसके अतिरिक्त कुष्ठ रोगी को समय पर दवाई देने की जिम्मेवारी आशा वर्कर्स को भी सौंपी जाती है।
छूत से नहीं फैलता यह रोग
कुष्ठ रोग एक जीर्ण रोग है, जो कि शरीर के ऊपरी हिस्से में होता है। रोगाणु से होने वाला यह रोग वंशागत भी हो सकता है, लेकिन इसका संबंध देवीय प्रकोप से नहीं होता है। यह भी बताया गया कि यह रोग छूत से नहीं फैलता है। इसमें हल्दी, नीम, एरोमाथैरेपी, मंडुकपपर्णी, बाबची, व्हीट ग्रास, कालमोगरा का तेल काफी कारगर साबित होता है। कुष्ठ रोगी पूरी तरह से सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है।
गांव में दूषित पानी सप्लाई
गुभाना गांव में पेयजल की सप्लाई दूषित है। जिस वाटर टैंक से पानी सप्लाई किया जाता है, उसकी सफाई हुए वर्षों हो गए हैं। तालाब में पानी सड़ रहा है, जबकि दूषित पानी से जलजनित बीमारियां होती हैं, जिनमें चमड़ी रोग की संभावना सबसे ज्यादा होती है। ग्रामीणों स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों से तालाब की सफाई कराने की मांग की।
यह बोले अधिकारी
कुष्ठ रोगी बहादुरगढ़ क्षेत्र में ज्यादा हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में कुष्ठ रोगी का मिलना चिंता का विषय है। आमतौर पर गांव में इस तरह के रोगी नहीं मिलते हैं। इस मामले में पूरा स्टेटस जांचा जाएगा। इसके अतिरिक्त विभाग की टीम भी कारणों को जानने के लिए तैयार की गई है।
-रमेश धनखड़, सीएमओ