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18 साल पहले बसी 12 हजार आबादी वाली कॉलोनी छोटूराम नगर में पानी की मारामारी

Fri, 13 May 2016 01:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर
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पानी की किल्लत - फोटो : bureau
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गर्मी बढ़ने के साथ ही शहर की कई कॉलोनियों में पीने के पानी की किल्लत बढ़ गई है। शहर में पेयजल की सबसे ज्यादा कमी लगभग 12 हजार की आबादी वाली कॉलोनी छोटूराम नगर में नजर आ रही है। यहां यह समस्या पहली बार नहीं है, बल्कि लगभग 18 साल पहले जब से ये कॉलोनी बसी है तभी से यहां के लोग जल संकट झेल रहे हैं। वार्ड-10 व 9 में बंटा छोटूराम नगर दिल्ली से सटे आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र (एमआइई) से सटा हुआ है। इस कॉलोनी में रहने वाले अधिकतर लोग एमआइई की फैक्ट्रियों में काम करते हैं। कम आय वर्ग के ये लोग इस कालोनी में छोटे-छोटे मकान बनाकर रहे हैं। यहां कोई मूलभूत सुविधा समुचित तरीके से नहीं मिलती। पेयजल का अभाव सबसे बड़ी समस्या बनी है। लोगों को खरीदकर पानी पीना पड़ता है। सुबह छह से करीब 9 बजे तक लोग पानी के टैंकरों पर मंडराते हुए देखे जा सकते हैं।
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सरकारी जलापूर्ति नहीं
छोटूराम नगर में 12 हजार से ज्यादा लोग रहते हैं। लेकिन इतनी बड़ी कॉलोनी होने के बावजूद सरकार की ओर से जलापूर्ति नहीं की जाती। गलियों में पेयजल की पाइप लाइन नहीं दबी है, इसलिए घर-घर कनेक्शन का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। अधिकारी कहते हैं कि कुछ समय पहले तक यह कालोनी अवैध थी, इसीलिए यहां वाटर सप्लाई करना संभव नहीं था। अब योजना बनाई जाएगी। फिलहाल तो विभाग टैंकर से भी पानी नहीं भेजता।

पीने लायक नहीं भू-जल
छोटूराम नगर में भू-जल न केवल खारा है, बल्कि फैक्ट्रियों से निकलने वाले अव जल से मिला दूषित जल है। यहां बोरिंग करें तो 80 से 130 फीट गहराई में जाकर ही पानी मिलता है। इतनी ज्यादा गहराई में जाने के बाद जो पानी मिलता है वह भी इतना खारा कि उसको पीना संभव ही नहीं। अगर कपड़े धोने लायक निकल आए तो सौभाग्य की बात होगी।
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-नवीन कुमार

दिनचर्या भी हो जाती है प्रभावित
हम यहां 15 साल पहले बसे थे। तभी से पानी खरीद लाते हैं। दो रुपये में पांच लिटर पानी मिलता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से यह भी बहुत अच्छा नहीं होता। कई बार तो निजी टैंकर दूसरी गलियों में पानी बेचने लगते हैं और हमारे यहां बहुत देर से आते हैं। जिससे हमें घर में भोजन बनाने में देरी हो जाती है और समय से ड्यूटी के लिए फैक्टरी नहीं जा पाते।
-इंदु, कामकाजी महिला

वोट तो लेते हैं, पर पानी नहीं देते
उन नेताओं को शर्म आनी चाहिए जो हमारी वोट लेने के लिए चुनाव के वक्त तो आ जाते हैं। लेकिन उसके बात चाहे हम प्यासे मरें, या भूखे मरें नेता हमारी जात नहीं पूछते। नेताओं के घरों व दफ्तरों में तो हर रोज हजारों लिटर पानी बहा दिया जाता है, लेकिन हमें पीने के लिए भी मिलता। हम हर नेता के दर पर रोते हैं, पर कोई सुनवाई नहीं होती।
-दयावंती, दुकानदार

पानी खरीदकर भी नहीं चलता गुजारा
मैं हर रोज 10 रुपये में 20 लिटर पानी खरीदती हूं, जिससे चार लोगों का पीने व रसोई का गुजारा मुश्किल से चलता है। नहाने व कपड़े धोने के लिए हैंड पंप से निकाल कर भू-जल का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इस पानी में साबुन काम नहीं करता। जिससे शैंपू का खर्च भी बढ़ जाता है।
-देवी शर्मा, गृहिणी

बेरी में पानी की सप्लाई को लेकर बुरा हाल
 पानी की सप्लाई को लेकर बेरी के लोगों का बुरा हाल है। पाना चुल्याण और हिंदयाण में पिछले काफी समय से पीने के पानी की समस्या दिनोंदिन जटिल बनती जा रही है। लोगों ने बताया कि संबंधित विभाग को बार-बार मौखिक रूप में शिकायत देने के बावजूद भी इस समस्या की तरफ विभाग का कोई ध्यान नहीं है। विभाग की लापरवाही व अनदेखी के चलते बेरी वासियों को इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वीरवार को मोेहल्ले में पानी की सप्लाई न आने से महिलाओं एकत्रित होकर जलघर कार्यालय पहुंची और जमकर बवाल काटा और कार्यालय में मौजूद अधिकारियों को खुब-खरी-खोटी सुनाई और अपने कार्य से फील्ड में जा रहे एसडीओ की गाड़ी को घेराव किया और गेट से बाहर नहीं जाने दिया कहां समस्या का समाधान चहिए पहले बाद में जाने देंगे। यहां तक जलघर में पहुंची महिलाओं ने चेतावानी दिया कि अगर जल्द ही दोनों वार्डों में पानी की सप्लाई नहीं हुई तो जलघर में ताला लगा दिया जाएगा। महिलाओं का कहना था कि पिछले एक माह से ज्यादा समय बीत गया मोहल्लेे में पानी की सप्लाई न होने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पीने व घर के कार्यों के लिए पानी दूर-दराज खेतों से लाना पड़ता है। जिससे सारा दिन पानी लाने में चला जाता है और घर के कार्य भी समय पर नही हो पाते है।
 
जलघरों के टैंकों में जमी गंदगी
ूपूर्व पार्षद प्रवीन्द्र ने बताया कि बेरी जलघर में बने टैंकों व फिल्टरों में गंदगी जमी हुई है और कई सालों से सफाई भी नही हुई, जिससे पानी भी साफ व स्वच्छ नहीं मिल रहा है और उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग को सर्दियों में सफाई क्यों नहीं कराई जाती गर्मी के मौसम में पीने के पानी की समस्या बनती है और तब विभाग इन फिल्टरों की सफाई कराने का कार्य करता है जिससे कस्बे में पानी की सप्लाई ठप्प हो जाती है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। विभाग कहता है कि फिल्टरों की सफाई का कार्य चल रहा है।

जलघर के फिल्टरों में मछलियों का डेरा
वीरवार को जब बेरी के पाना चुल्याण व हिंदयाण पाने में पानी की सप्लाई न होने को लेकर मोहल्ले की महिलाएं जलघर पहुंची तो देखा कि जलघर के फिल्टरों में मछलियों का डेरा था और वहां पर दुर्गंध आ रही थी। जलघर के टैंकों की दीवार भी टूटी पड़ी हुई है इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभाग जनता को स्वच्छ व शुद्घ पानी की सप्लाई देने में प्रति जागरूक है।

फायर बिग्रेड की गाड़ी को भी नहीं मिलता है पानी
बता दे कि प्रशासन ने कस्बे में आगजनी की कोई घटना हो उस पर काबू पाने के लिए फायर बिग्रेड की गाड़ी को खड़ा किया हुआ है और उसको भी जलघर से समय पर पानी नही मिलता है। ऐसे में कोई आगजनी की घटना हो जाए तो आग पर काबू नही पाया जा सकता।

जन स्वास्थय विभाग के जेई दलबीर देशवाल से बात की गई तो उनका कहना था कि जलघर में फिल्टरों में सफाई का कार्य चला हुआ है और जिससे कस्बे के लोगों को पानी सप्लाई के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और दोपहर को नए जलघर से दोनों पानों में सप्लाई दे दी गई और जल्द ही फिल्टरों की सफाई करा दी जाएगी और कस्बा वासियों को किसी परेशानी का सामना नही करने दिया जाएगा।
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