दूबलधन सीएसची से कबाड़ा एंबुलेंस ठीक करने को भेजी गई पर लौटने के बाद भी उसकी हालत खटारा ही है। एंबुलेंस का कोई पता नहीं कि मरीज को ले जाते समय कब बीच रास्ते में यह दम तोड़ देगी और मरीज का साथ छोड़ देगी कोई भरोसा नहीं। बता दें कि विभाग ने एंबुलेंस हादसे के बाद ही ठीक कराने को भेजा था। पांच दिन पहले बीच रास्ते में खटारा एंबुलेंस खराब होने से गर्भवती महिला के गर्भ में बच्चा मर गया था। हादसे के बाद भी विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। हालात देखकर तो यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभाग शायद फिर से किसी घटना का इंतजार कर रहा है। चार माह पहले यहीं एंबुलेंस झज्जर से रोहतक पीजीआई गर्भवती महिला को लेकर जा रही थी तो रोहतक बाईपास के पास खराब हो गई थी तो बाद में बेरी अस्पताल से एंबुलेंस को बुलाया गया था।
एंबुलेंस में ऑक्सीजन मिलती तो शायद बच जाते बच्चे
8 मई को बेरी क्षेत्र के गांव डीघल में कार में दम घुटने से तीन मासूम बच्चे बेसुध हालत में कार में मिले तो परिजनों द्वारा बेसुध हालत में तीनों मासूमों को डीघल सीएचसी में लाया गया। वहां मौजूदा एंबुलेंस भी खराब थी और आक्सीजन भी नहीं मिली थी तो परिजन मासूमों को अपनी गाड़ी में लेकर गए और एक ही सिलेंडर आक्सीजन का मिला था, जोकि अपनी पसर्नल गाड़ी में लग नहीं पाया था और बीच रास्ते में दो मासूमों ने तो दम तोड़ दिया था और एक मासूम में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। बाद में ग्रामीणों द्वारा सीएचसी में सुविधाएं कराने के लिए हंगामा किया गया तो विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर खटारा एंबुलेंस को बेरी भेज कर बेरी की नई एंबुलेंस को डीघल सीएचसी में लगा दिया गया।
बीच रास्ते में खराब हुई एंबुलेंस गर्भ में ही मर गया बच्चा
23 मई को बेरी के नागरिक अस्पताल एक गर्भवती महिला रेफर हुई। खटारा एंबुलेंस ने बेरी से डीघल पहुंचने में आधे घंटे से ज्यादा समय लगा दिया और बाद में डीघल टोल टैक्स पर खराब हो गई और डीघल सीएचसी से दूसरी एंबुलेंस को बुलाया गया। जब तक गर्भवती महिला को ब्लीडिंग ज्यादा हो गई थी और बाद में गर्भवती महिला पीजीआई पहुंची तो गर्भ में ही बच्चा मर गया था तो परिजनों ने आरोप लगाया था कि अगर एंबुलेंस बीच रास्ते में खराब नहीं होती तो गर्भ में बच्चा नहीं मरता।
लगभग 3 वर्ष पहले भी डीघल हुई खटारा एंबुलेंस खराब
कस्बे तीन वर्ष पहले एक कार्यक्रम चल रहा था कार्यक्रम में एक व्यक्ति की तबियत बिगड़ गई थी, जब बेरी के सामान्य अस्पताल में भर्ती करवाया तो प्राथमिक उपचार के बाद व्यक्ति को रोहतक पीजीआई एमएस रेफर कर दिया गया था और बाद गांव बेरी से दस किलोमीटर की दूरी पर गांव डीघल में एंबुलेंस खराब हो गई थी और बाद में गांव डीघल के सामान्य अस्पताल से एंबुलेंस का चालक भी नही मिला था तो व्यक्ति को निजी वाहन ले जाना पड़ा, हालांकि उसकी जान तो बच गई, वरना बड़ी घटना घट जाती।
क्या कहते हैं एसएमओ
बेरी नागरिक अस्पताल के एसएमओ जेपी चौहान ने कहा कि वीरवार को सीएमओ झज्जर ने बेरी के अस्पताल का दौरा किया था और बेरी में नई एंबुलेंस की मांग की गई और जल्द ही बेरी में सरकार की तरफ से नई एंबुलेंस आ जाएगी और फिर आमजन को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नही करना पड़ेगा।