विधानसभा चुनाव में झज्जर जिले में इस बार कई नए रिकार्ड बन गए। इसी वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव में बहादुरगढ़ से कांग्रेस की करीब पांच हजार मतों की हार विधानसभा में बनी रही।
जबकि बादली में 11 हजार मतों से लोकसभा चुनाव हारने वाले भाजपा के धनखड़ ने इस बार उलटफेर करके जीत हासिल की।
सबसे बड़ा रिकार्ड झज्जर से कांग्रेस की प्रत्याशी गीता भुक्कल ने रचा। उन्होंने लोकसभा में कांग्रेेस को मिली जीत से बड़ी जीत हासिल करके सिद्ध कर दिया यहां कांग्रेस का वर्चस्व है।
जबकि बेरी में कांग्रेस के डॉ रघुबीर सिंह कादयान ने जीत का चौका लगाया है। जो कि रिकार्ड है। विधानसभावार बात करें तो झज्जर जिले ने इस बार कई रिकार्ड बनाए हैं।
पिछले चुनाव में झज्जर विधानसभा सीट से कांग्रेस की गीता भुक्कल ने 28 हजार से अधिक मतों से जीत पाकर यहां से सबसे बड़ी जीत का रिकार्ड बनाया था।
इस बार हालांकि वे अपना रिकार्ड तोड़ने से थोड़ा पीछे रह गई और साढे़ 26 हजार से ज्यादा मतोंसे जीतकर रिकार्ड बना दिया है। प्रदेश के किसी शिक्षामंत्री के रहने के बाद दोबारा जीतने वाली वे केवल दूसरी उम्मीदवार हैं।
अन्यथा प्रदेश की सरकार में जो भी शिक्षामंत्री रहा वह चुनाव हार गया। इस लिहाज से गीता भुक्कल ने रिकार्ड बनाया है। पिछले लोकसभा चुनाव की बात करें तो झज्जर से सांसद दीपेंद्र हुड्डा 22 हजार मतों से जीते थे।
लेकिन यहां की जनता ने अब गीता भुक्कल को 26 हजार से अधिक मतों से जीत हासिल की है। इनेलो की गढ़ रही झज्जर सीट पर कांग्रेस की यह निरंतर तीसरी जीत है।
2005 के बाद 2009 व अब 2014 में यह लगातार तीसरी जीत है। बेरी विधानसभा चुनाव में डॉ रघुबीर सिंह कादियान ने लगातार चौथी जीत हासिल की। वर्ष 2000 के चुनाव से वे विजयी होते आ रहे हैं।
कांग्रेस के प्रत्याशी के नाते यह उनकी निरंतर चौथी जीत है। जबकि एक बार वे ताऊ देवीलाल की पार्टी से भी विधायक बने थे।
डॉ कादयान ने पिछले चुनाव में भी और इस चुनाव में भी रोमांचक मुकाबले में विजय हासिल की है। यहां से उन्होंने चतर सिंह को हराया।
बादली में नया इतिहास रचा गया है। बादली सीट कांग्रेस के पास थी जो भाजपा ने छीनी है। भाजपा के ओपी धनखड़ पिछले लोस चुनाव में रोहतक के प्रत्याशी थे।
तब उन्हें बादली से 11 हजार मतों से पिछड़ना पड़ा था। इसके बावजूद उन्होंने बादली सीट से चुनाव लड़ने ठानी। इस सीट पर उन्होंने 9264 मतों जीत हासिल करके भाजपा के लिए यह नया दरवाजा खोला है।
चूंकि इस सीट पर पांच बार धीरपाल सिंह जीते थे जबकि दो बार नरेश शर्मा विजयी हुए थे। इस बार कांग्रेस के नरेश शर्मा यहां से चौथे नंबर पर रहे।
जबकि निर्दलीय प्रत्याशी कुलदीप दूसरे नंबर पर रहे। धनखड़ की जीत से यहां एक नया रिकार्ड भी बना कि लोस में पिछड़ने के बाद विस में जीत हासिल की।
बहादुरगढ़ विधानसभा के रिकार्ड बात करें यहां से कांग्रेस के राजेंद्र जून हैट्रिक लगाने से चूक गए। लोस चुनाव में पांच हजार से ज्यादा की जीत भाजपा के लिए संजीवनी बनी।
विस चुनाव में भी भाजपा की जीत का अंतर करीब पांच हजार रहा। हालांकि यहां दो निर्दलीय प्रत्याशी भी काफी मेहनत कर रहे थे।
मगर मुख्य मुकाबले में नरेश कौशिक ने जीत हासिल करके भाजपा को सीट दिला दी। बहरहाल, चारों की विधानसभा सीटों पर इस बार कुछ न कुछ नए रिकार्ड बने हैं।