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झज्जर के दीयों से जगमगाएंगे महाराष्ट्र के शहर

Tue, 07 Oct 2014 12:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर बहादुरगढ़
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महाराष्ट्र के कई शहर इस बार दीपावली पर झज्जर में बने दीयों से जगमगाएंगे। महाराष्ट्र से दीये बनाने के सबसे अधिक आर्डर यहां के कुम्हारों को मिले हैं।
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कुम्हार आर्डर पूरा करने के लिए दिन-रात काम में जुटे हैं। दीवाली नजदीक होने के चलते यहां से दीयों की सप्लाई भी शुरू हो चुकी है।

महाराष्ट्र ही नहीं आगरा, कलकत्ता, जयपुर व लखनऊ में भी दीवाली पर यहां के बने दीये जलाए जाते हैं। दूसरे प्रदेशों व बडे़ शहरों में जहां झज्जर में बने दीयों की मांग बहुत ज्यादा है, वहीं प्रदेश में दीयों का प्रचलन लगातार घटता जा रहा है।

स्थानीय लोग दीयों की जगह रंग-बिरंगी लाइटें लगाना पसंद करते हैं। इसके कारण दीये बनाने वाले कुम्हार इस काम से पलायन करते जा रहे हैं।

शहर में कुम्हार समाज के लगभग 150 परिवार दिए बनाने का काम करते हैं। दिवाली तक करोड़ों की संख्या में दीये बनाए जाएंगे।

इनमें से मात्र कुछ ही दीये झज्जर या आसपास के जिलों में सप्लाई के लिए जाएंगे। बाकी सभी दीये देश के दूसरे शहरों में सप्लाई होंगे।

इन शहरों में होंगे सप्लाई
सबसे ज्यादा दीये महाराष्ट्र में सप्लाई होते हैं। कुम्हार इंद्रपाल ने बताया कि उनके बनाए हुए दीये महाराष्ट्र के मुंबई, पूना, सुरत व जलगांव शहरों में भारी संख्या में सप्लाई किए जाते हैं।
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इसके अलावा आगरा, जयपुर व लखनऊ में भी यहां के दीयों की भारी मांग है। इंद्रपाल ने कहा कि उन्हें दुख इस बात का होता है कि अपने ही राज्य व शहर में दीयों के प्रति लोगों का रुझान कम हो रहा है। उनकी कला की कोई कद्र नहीं है।

चाइनीज लाइट ने किया बंटाधार
कुम्हार कृष्ण ने बताया कि जब से बाजार में चाइनीज लड़ी आई हैं, तब से लोगों ने परंपरागत दीये जलाने छोड़ दिए हैं।

इस कारण कुम्हारों का कारोबार काफी कम हो गया है। महाराष्ट्र व राजस्थान में अब भी लोग दिवाली पर दीये जलाते हैं। इस कारण ही रोजी रोटी चल रही है।

गांव दुजाना निवासी प्रीत प्रजापत ने बताया कि आधुनिकता के चलते परंपरागत दीयों की बिक्री में कमी आई है। स्थानीय बाजारों में मांग कम होने से प्रतिवर्ष व्यापार घट रहा है। कई लोगों ने दीये बनाने का काम ही छोड़ दिया है।

हर साल महंगी हो जाती है मिट्टी
इंद्रपाल ने बताया कि उन्हें चिकनी मिट्टी मिलने में बड़ी भारी परेशानी होती है। शहर के नजदीकी गांव पासोर, कबलाना व छुड़ानी में काफी मात्रा में चिकनी मिट्टी है, लेकिन लोग उसे बेचते नहीं हैं।
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अगर बेचते हैं, तो उसकी कीमत बहुत ज्यादा मांगी जाती है। पिछली दीवाली पर चिकनी मिट्टी की एक ट्राली 1800 से 2000 रुपये में मिल रही थी, वहीं इस बार ट्राली का भाव 3000 रुपये से 3200 रुपये तक पहुंच गया है।
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