जाट आरक्षण को लेकर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की एक बैठक अहलावत खाप के प्रधान जय सिंह अहलावत की अध्यक्षता में सर छोटूराम धर्मशाला में हुई। बैठकमें जाट आरक्षण को लेकर चल रहे संघर्ष और आगामी कदम को लेकर चर्चा की गई।
बैठक में मास्टर ताराचंद जाखड़ ने कहा कि आज खेती कमाई का साधन नहीं रहा है। हमारे बच्चे केवल फौज में ही जा रहे हैं। कामकाज करने के लिए पैसे की आवश्यकता होती है जो हमारे पास नहीं है।
आज जाटों की स्थिति दयनीय हो गई है। इसके चलते जाटों के समक्ष अहीर, गुर्जर, सैनी जो खेतेबाड़ी का धंधा करते हैं। उनको आरक्षण दिया गया है तो जाटों को आरक्षण क्यों नहीं दिया गया है। बिरेंद्र सिंह कादयान ने कहा कि हम किसी जाति का विरोध नहीं कर रहे हैं और न किसी का आरक्षण छीन रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के समय में गुरनाम आयोग ने जाट, बिश्नोई, ताज्ञी, रोड व जट सिक्ख इनको 11 प्रतिशत आरक्षण में शामिल किया जाए। वरना जाट आरक्षण संघर्ष समिति किसी भी हद में जा सकती है। उन्होंने कहा कि आरक्षण जाटों का संवैधानिक अधिकार है।
आज जाटों को निर्वाह करना बहुत कठिन हो गया है। अब बच्चों की पढ़ाई, विवाह शादी करना तो दूर की बात हो गई है। 35-36 साल के जाट युवा गलियों में बेरोजगार घूम रहे हैं। प्रदेश की जेलों में 80 प्रतिशत जाट भरें है। उन्होंने कहा कि 12 फरवरी को हिसार के मयड़ गांव में आरपार की लड़ाई की घोषणा की जाएगी।
इसके लिए गांव-गांव जाकर लोगों को महारैली के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। बैठक में राष्ट्रीय महासचिव डॉ. ओमप्रकाश धनखड़, अनिल रोज, कर्नल शेर सिंह, कैप्टन दिलबाग सिंह, अतर सिंह कादयान, कंवर सिंह पहलवान प्रधान झज्जर 360, प्रकाश माजरा, मंजीत खुड्डन, कृष्णा गुढ़ा, मांगेराम, कैप्टन मानसिंह दलाल, रामचंद्र, उमराव बेरी, दीपचंद, राजेश झामरी, राजेंद्र धनखड़ सहित अन्य भी मौजूद रहे।