अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे रद्द कराने और न्याय पाने के लिए जाटों को आंदोलन करना होगा, लेकिन इस बार आंदोलन नेतृत्व विहीन और हिंसक नहीं होना चाहिए। वह रविवार को गांव छारा में हुई जाटों की पंचायत को संबोधित कर रहे थे।
जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के आरोप में जेलों में बंद लोगों को रिहा करने, उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने, आंदोलन में मारे गए लोगों के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा देने और केंद्र में भी आरक्षण देने आदि मांगों को लेकर रविवार को गांव छारा में जाटों की पंचायत हुई।
पंचायत का आयोजन योगदानी आजाद सहयोग सेवा समिति ने किया। पंचायत में कई जिलों के सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। पंचायत में अपने विचार व्यक्त करते हुए जाट नेता यशपाल मलिक ने बताया कि देशभर के जाटों की मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए आगामी 10 मई को दिल्ली में जंतर-मंतर पर जाटों की सभा होगी। मांगें पूरी कराने के लिए उन्होंने आंदोलन को जरूरी बताया। लेकिन कहा कि इस बार आंदोलन नेतृत्व विहीन नहीं होना चाहिए और हिंसक नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज हरियाणा में संकट की घड़ी है। राज्य सरकार मेरे समर्थकों का उत्पीड़न कर रही है। सरकार को नामजद लोगों के खिलाफ लगाई कई संगीन धाराएं हटानी होंगी और मुकदमे वापस लेने होंगे। मास्टर साहब सिंह ने उन परिवारों को तुरंत आर्थिक मदद देने की मांग की जिन परिवारों के सदस्य आंदोलन के दौरान दुनिया से चले गए।
उन्होंने कहा कि अगले 5-6 दिन में जाटों के सभी संगठनों में तालमेल बनाकर अपनी मांगों को लेकर संगठित प्रयास किए जाएंगे। योगदानी आजाद सहयोग सेवा समिति के अध्यक्ष महेंद्र समेत गांव के काफी युवाओं ने भी पंचायत में भाग लिया।