झज्जर। आमतौर पर सरकारी कार्यालयों में कोई फर्नीचर टूटने या पुराना होने पर उसका प्रयोग बंद कर दिया जाता है और उसे खराब घोषित कर स्टोर रूम या बाहर खुले में रख दिया जाता है, लेकिन झज्जर के सरकारी कार्यालयों में ऐसा नहीं होता। जिले के सरकारी कार्यालयों में खराब या कंडम होने वाले फर्नीचर को स्टोर रूम की शोभा बनाने की बजाय उन्हें आईटीआई के विद्यार्थियों को दिया जाता है, जिसे वह रिपेयर कर दोबारा प्रयोग में लाने लायक बनाते हैं। ऐसा पिछले काफी समय से चल रहा है। पहले चरण में जिले के 124 सरकारी स्कूलों के तीन हजार से ज्यादा टूटे हुए बेंच व अन्य सामान को आईटीआई के विद्यार्थियों ने ठीक किया और अब दूसरे चरण में सरकारी अस्पतालों के खराब हुए सामान को दोबारा प्रयोग में लाने के लिए उनको रिपेयर करने का काम किया जा रहा है। इसमें जिला नागरिक अस्पताल के अलावा सीएचसी व पीएचसी के खराब सामान को भी ठीक किया जाएगा। दूसरा चरण पूरा होने के बाद सभी सरकारी कार्यालयों को तीसरे चरण में शामिल किया जाएगा और वहां पड़े फर्नीचर को ठीक कर दोबारा प्रयोग में लाने का काम किया जाएगा। सरकारी अस्पताल में कुर्सी, मेज, ग्लुकोज बोतल स्टैंड के अलावा अलमारी व अन्य सामान को ठीक किया जा रहा है। इसे आईटीआई में प्रशिक्षण ले रहे विद्यार्थी ही ठीक करते हैं। सामान को गैस कटर मशीन से ठीक किया जाता है और उसके बाद पेंट भी कर दिया जाता है ताकि वह नया दिखे।
प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण मिल जाता है, सामान नया जैसा हो जाता है
इस काम के चलते आईटीआई में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को प्रशिक्षण मिल जाता है और सरकारी कार्यालयों का सामान नया जैसा हो जाता है। उसे काफी समय तक प्रयोग किया जा सकता है। ऐसे में दोबारा सामान प्रयोग होने पर सरकार के लाखों रुपये के बजट की भी बचत होती है।
सरकार ने भी सराहा
आईटीआई के विद्यार्थियों के इस काम को राज्य सरकार ने ही नहीं बल्कि केंद्रीय मंत्रालय ने भी सराहा है। प्रदेश सरकार ने तो इसे सभी आईटीआई में भी लागू करने के निर्देश दिए हुए हैं।
वर्जन
पहले चरण में सरकारी स्कूलों के बेंच व अन्य सामान को आईटीआई प्रशिक्षुओं द्वारा ठीक किया गया था। अब दूसरे चरण में सरकारी अस्पतालों के सामान को ठीक किया जा रहा है। तीसरे चरण में सभी सरकारी कार्यालयों को शामिल कर उनके वहां पुराने सामान को ठीक किया जाएगा।
-जीतपाल, प्रिंसिपल, आईटीआई गुढ़ा