बहादुरगढ़-झज्जर मार्ग पर बने गड्ढे।
बहादुरगढ। यूं तो बहादुरगढ़ से झज्जर तक का सफर कुल 35 मिनट का है, लेकिन सड़क पूरी तरह टूट चुकी है। इसके कारण अब यह सफर लंबा हो गया है। इस सफर को तय करने में अब डेढ़ घंटे से अधिक समय लग रहा है। मजबूरन वाहन चालक बहादुरगढ़ से वाहन चालक बादली होते हुए झज्जर तक का सफर तय कर रहे हैं। वर्ष 2017 में इस मार्ग को राजमार्ग का दर्जा भी मिल चुका है, लेकिन अभी तक यह एनएचएआई ने टेकओवर नहीं किया है।
्र पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि झज्जर रोड की हालत सुधारने के लिए एस्टीमेट दोबारा बनाकर भेजा गया है। जल्द ही इसकी हालत सुधारी जाएगी। हालांकि सड़क को नए तरीके से बनाने की बजाय इस पर तारकोल की परत बिछाने का काम किया जाएगा।
बहादुरगढ़ से झज्जर की दूरी 32 किलोमीटर है। इस सफर को तय करने में ठीक सड़क से 35 मिनट का समय लगता है। अब सड़क पूरी तरह टूट चुकी है। इसकी वजह से इस दूरी का तय करने में वाहन चालकों के पसीने छूट रहे हैं। सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे नजर आते हैं। बहादुरगढ़ में बने बाईपास के बाद झज्जर की तरफ जाने वाली सड़क पर वाहन रेंग कर चलते हैं। वाहन चालक सुरेश कुमार, डाबौदा निवासी प्रवीण कुमार, नूना माजरा निवासी नवीन शर्मा का कहा है कि अनेकों बार इस मार्ग के सुधार की मांग प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं से की गई है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। आए दिन वाहन इन गड्ढों में फंसकर क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। सबसे ज्यादा समस्या कमर्शियल वाहन चालकों को हो रही है। लोड होने के कारण इस मार्ग पर वाहन गड्ढों में फंस जाते हैं और उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ती है। गड्ढों का आकार कोई एक-दो फुट का नहीं बल्कि कई-कई फुट गहरा और चौड़ा है। बहादुरगढ़-झज्जर मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित हुए करीब 7 साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की ओर से इसे टेकओवर नहीं किया गया है।
वर्जन...
बहादुरगढ़-झज्जर मार्ग की हालत सुधारने के लिए एस्टीमेट दोबारा बनाकर मुख्यालय भेजा गया है। इस मार्ग पर तारकोल की एक परत बिछाने के काम किया जाएगा। जल्द ही इस दिशा में काम होगा।
-सुमित कुमार, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी बहादुरगढ़।