झज्जर। प्रदेश की जनसंख्या लगातार तीव्र गति से बढ़ती ही जा रही है, जिसके चलते समाज में आधारभूत वस्तुओं की कमी साफ नजर आने लगी है। एक तरफ जनसंख्या जहां लगातार बढ़ रही है तो वहीं दूसरी तरफ जमीन सिकुड़ती जा रही है। जनसंख्या विस्फोट पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के द्वारा किए जाने वाले परिवार नियोजन के उपाय फीके नजर आने लगे हैं। परिवार नियोजन के उपाय अपनाने में महिलाएं आगे हैं लेकिन महिलाओं के द्वारा भी योजना के तहत करवाई जाने वाली नलबंदी के आंकड़ों में लगातार गिरावट आती जा रही है। पिछले सालों की अपेक्षा इस वर्ष भी परिवार नियोजन के प्रति रुझान कम ही हुआ है। अगर आंकड़ों पर नजर दौड़ाई जाए तो मौजूदा वित्त वर्ष में भी अप्रैल से लेकर नवंबर तक केवल 1757 नलबंदी के केस दर्ज किए गए हैं।
कुछ इस तरह है परिवार नियोजन का ग्राफ
वर्ष महिला नलबंदी पुरूष नसबंदी
2014-15 2417 115
2015-16 2289 57
2016-17 में नंवबर तक 1757 24
प्रोत्साहन से भी नहीं बन रही बात
बढ़ती हुई जनसंख्या पर अंकुश लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के द्वारा कई तरह से प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें से एक परिवार नियोजन अपाने वालों को प्रोत्साहन राशि देना भी है। योजना के तहत नसबंदी करवाने वाले पुरुष को 1500 रुपये तथा डिलीवरी के एक सप्ताह में नलबंदी करवाने वाली महिला को 2100 रुपये तथा रूटीन नलबंदी करवाने पर महिला को 1400 रुपये प्रोत्साहन के तौर पर दिए जाते हैं। विभाग के इस कदम से भी कुछ खास फर्क नजर नहीं आ रहे हैं। इतना ही नहीं विभाग के द्वारा तो फैमिली प्लानिंग के लिए किसी महिला या पुरुष को प्रोत्साहित करने वाली आशा वर्कर को 1000 रुपये तथा एएनएम और आंगनबाड़ी वर्कर को भी 200 रुपये दिए जाते हैं।
महिलाओं की अपेक्षा पुरुष का रुझान बेहद कम
जिले में परिवार नियोजन अपनाने को लेकर महिलाओं में पुरुषों की अपेक्षा काफी अधिक रुझान है। अगर पिछले दो साल के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो यह 100 को भी पार नहीं कर पाया है। वहीं महिलाओं से तुलना की जाए तो यह उनका 5 फीसदी भी नहीं है। परिवार नियोजन अपनाने में पुरुष अभी महिलाओं से कोसों दूर हैं।
चलाए जाते हैं जागरूकता कार्यक्रम
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को परिवार नियोजन के बारे में जागरूक करने के लिए समय-समय पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहते हैं। जिसमें महिलाओं और पुरुषों को परिवार नियोजन के फायदों से अवगत करवाया जाता है। महिलाओं में रुझान अधिक होने का मुख्य कारण एएनएम और आशा वर्कर की भूमिका अहम होती है। वहीं विभाग द्वारा जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए तैनात यशोदा के द्वारा भी महिलाओं को परिवार नियोजन के फायदे समझाए जाते हैं।
परिवार नियोजन के मामले में पुरुष काफी प्रकार की भ्रांतियां पाले हुए हैं, जिनके चलते वे नसबंदी करवाने से पीछे हट जाते हैं। वहीं महिलाओं की नलबंदी के लिए भी स्पेशल कैंप का आयोजन किया जाता है तो वहीं जागरूकता के लिए अनेक कार्यक्रम विभाग के द्वारा चलाए जा रहे हैं। आंकड़ों में सुधार लाने के लिए विभाग के लिए अब प्रोत्साहन राशि में भी बदलाव किया जा रहा है। - डा. राकेश, डिप्टी सिविल सर्जन, झज्जर।