गांव नूना माजरा के एक किसान परिवार के लड़के जीवेश जून ने इंटरनेशनल बायोलॉजी ओलंपियाड (आईबीओ) के पहले राउंड में चयन सुनिश्चित किया है। उनके पिता नरेश जून कहा कि वह काफी खुश है कि जीवेश ने महज 12 वर्ष की कम उम्र में यह गौरव पाया है। सातवीं कक्षा के छात्र जीवेश ने 12वीं के विद्यार्थियों के बीच मुकाबला करते हुए बौद्धिक तीक्ष्णता सिद्ध की है।
बता दें कि 12 साल का जीवेश इंटरनेशनल बायोलॉजी ओलंपियाड (आईबीओ) के दूसरे दौर में पहुंचने वाला सबसे कम उम्र का बालक बन गया है। इस प्रतियोगिता में मुख्यत: बारहवीं के स्टूडेंट हिस्सा लेते हैं। एचबीसीएसई के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक और रामास्वामी रिसर्च फेलोशिप के वैज्ञानिक विजय सिंह ने कहा कि जीवेश आईबीओ के पहले दौर में क्वालीफाई होने वाला सबसे कम उम्र का स्टूडेंट है। सात साल पहले कक्षा आठवीं के एक विद्यार्थी ने यह परीक्षा पास की थी। उन्होंने बताया कि 15 हजार स्टूडेंट्स होमी भाभा सेंटर फोर साइंस एजूकेशन (एचबीसीएसई) द्वारा आयोजित इस परीक्षा में शामिल हुए थे जिनमें से केवल 300 दूसरे दौर के लिए चयनित हुए।
विदित है कि इस प्रतिष्ठित आईबीओ में पदक पाने के लिए पांच दौर से गुजरना पड़ता है। इसमें मुख्यत: 12वीं के स्टूडेंट्स शामिल होते हैं। कोटा इंस्टीट्यूट के निदेशक ब्रजेश माहेश्वरी ने कहा कि कक्षा सातवीं का विद्यार्थी होने के कारण जीवेश जीवविज्ञान को विषय के तौर पर नहीं ले पाया लेकिन वह आईबीओ उत्तीर्ण करने में सफल रहा। वह नेशनल मैथ्स टैलेंट कंटेस्ट, नेशनल मैथ्स ओलंपियाड जैसी कई प्रतिस्पर्धाओं में ख्याति अर्जित कर चुका है। जीवेश के पिता नरेश जून व मां दर्शना ने इसे अपने बेटे की कड़ी मेहनत का परिणाम बताया। जीवेश पहले शहर के सेंक्चूअरी स्कूल में पढ़ता था और उसकी क्षमता को देखते हुए उसका दाखिला दो साल पहले राजस्थान के कोटा में करवाया था। उसने न केवल परिवार या गांव बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है।
फोटो 10 : जीवेश जून।